उत्तराखंड : नवरात्रों में रिलीज होगा राकेश टम्टा द्वारा स्वरचित गीत

उत्तराखण्ड के जिला पौड़ी गढ़वाल ,द्वारीखाल ब्लाक के बमोली गांव में जन्मे श्री राकेश टम्टा का बचपन से ही संगीत और लोक गायकी से असीम लगाव रहा है। मध्यम आय वर्ग के राकेश टम्टा संगीत ही नहीं शिक्षा जगत में सक्रिय रहे जिसके फलस्वरूप उन्होंने हेमवन्ती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से एम०काम० तक शिक्षा हासिल की और इस समय दिल्ली में प्रतिष्टित निजी कंपनी में कार्यरत हैं।  उनके गाये हुए अनेकों गीत यूट्यूब पर उपलब्ध हैं इस प्रकार अपनी गायकी से श्री टम्टा गढ़वाल की लोक संस्कृति का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। उनकी लोकगीतों की खासियत यह भी है उनके द्वारा गाये जाने वाले सभी गीतों के रचनाकार भी श्री राकेश टम्टा स्वयं ही हैं।

हर्ष का विषय है कि सिद्धपीठ श्री नागदेव गढ़ी की महत्ता पर श्री राकेश टम्टा की रचना और उनकी मधुर आवाज में गाया गीत जल्द ही नवरात्रों में रिलीज हो रहा है। यहां पर यह बतलाना जरूरी हो जाता है कि लगभग 250 वर्ष प्राचीन सिद्धपीठ श्री नागदेव गढ़ी द्वारीखाल ब्लाक के चेलूसैण के समीप सुंदर प्राकृतिक वातावरण में स्थित है। यहां पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा और अपनी इच्छाओं की पूर्ति हेतु आते रहते हैं। वर्ष में कई बार धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन आयोजित किए जाते रहते हैं जिनमें निकटवर्ती सभी गांवों के निवासी शामिल होते हैं। सिद्धपीठ श्री नागदेव गढ़ी श्रद्धा का केंद्र है। सिद्धपीठ श्री नागदेव गढ़ी पर गाया गया संभवतः एकमात्र भजन है।और इसके लिए श्री टम्टा बधाई के पात्र हैं।


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