कोटद्वार ट्रेंचिंग ग्राउण्ड मुद्दा, एनजीटी ने लगाई फ़टकार और दिए आदेश

उल्लेखनीय है कि, देवभूमि उत्तरखंड गढ़वाल का प्रवेश द्वार कहलाये जाने वाले कोटद्वार नगर में इस वक़्त सबसे ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है, ट्रेंचिंग ग्राउण्ड के लिए भूमि चयन कहाँ और कैसे होगा इस सम्बन्ध में फैसला आने का कोटद्वारवासियों को बेसब्री से इंतज़ार है।

ग़ौरतलब है कि, कोटद्वार बीते कई सालों से कूड़ा निस्तारण की समस्या से जूझ रहा है। दिन ब दिन विकट होती इस समस्या के निदान हेतु अब तक प्रदेश सरकार की ओर से किसी प्रकार का कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

वहीं, अगर बात करें अधिवक्ता रोहित डंडरियाल की तो, ट्रेंचिंग ग्राउण्ड के इस ज्वलंत मुद्दे को लेकर शासन द्वारा अभी तक क्या कुछ किया जा चुका है और आगे इस विषय पर क्या होने की उम्मीद है को लेकर उनकी आवाज़ आज भी बुलंद हैं। उनका कहना है कि, कोटद्वार दुगड्डा ट्रेंचिंग ग्राउंड में कूड़ा डाल कर नदी को जहरीला किया जा रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ पशुओं के शव भी ट्रेंचिंग ग्राउंड में डाले जा रहे हैं, जिससे इलाके में महामारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। ज्ञात हो कि, कोटद्वार नगर में कूड़ा निस्तारण की लचर व्यवस्था के चलते यहां दिन प्रतिदिन हालात बद से बत्तर होते जा रहे हैं। एक तो पहले से यहां कोरोना संक्रमण की वजह से पहले ही लोग दहशत में हैं और ऊपर से जगह-जगह लगे कूड़े का अम्बार ने कोटद्वारवासियों की मुसीबतों में और अधिक इज़ाफ़ा कर दिया है।

इस सम्बंध में Wall of kindness संस्था से जुड़े सामाजिक कार्यकर्त्ता मनोज नेगी बनाम उत्तराखण्ड राज्य के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश को अनधिकृत परिस्थितियों के बारे में कोटद्वार-दुगड्डा,उत्तराखण्ड में पर्यावरण को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करते हुए कचरे के जलने के कारण प्रदूषण की गतिविधियाँ खोह नदी को भी प्रभावित कर रही हैं। यही नहीं कोटद्वार स्तिथ मुक्तिधाम सोसाइटी में ट्रेंचिंग ग्राउंड बनाये जाने से प्रदूषण से प्रतिकूल रूप से प्रभावित हुआ है। आलम ये है कि, कूड़ा मुक्तिधाम के मुख्य गेट तक फैल चुका है। जहाँ लोगों के आने-जाने के साथ-साथ इससे उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। नगर निगम प्रशासन द्वारा इस समस्या को लगातार नजर अंदाज किया जा रहा है। कोरोना के समय जहाँ एक ओर शासन प्रशासन लोगो से साफ़-सफाई बनाए रखने की अपील कर रही है। वहीं, एनजीटी ने उत्तराखण्ड पर्यावरण और संरक्षण नियंत्रण बोर्ड और डीएम पौड़ी गढ़वाल को 6 महीने के भीतर मामले पर कार्यवाही रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था।

अधिवक्ता रोहित डंडरियाल ने इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया कि, लगभग 12 महीने बीत जाने के उपरांत भी जब ट्रेंचिंग ग्राउण्ड के विषय में किसी प्रकार की सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली तो उन्होंने एक बार फिर से एनजीटी का रुख किया। अधिवक्ता रोहित डंडरियाल ने बताया कि, ये मामला बीते शुक्रवार को एनजीटी में लगा था। जिसमें एनजीटी द्वारा संज्ञान लिया गया तथा उत्तराखण्ड शासन, डीएम पौड़ी गढ़वाल, चेयर पर्सन दुगड्डा, उत्तराखण्ड पर्यावरण और संरक्षण नियंत्रण बोर्ड को कड़ी फटकार लगाते हुए इस मामले में फाइनल रिपोर्ट दो हफ्ते के भीतर जमा करने को कहा गया। वहीं, एनजीटी द्वारा इस मामले में कहा गया कि, लगभग इतना समय बीत जाने के बाद यह कार्य क्यों नहीं हुआ। साथ ही कहा कि, इस मामले में लिए गए कदम से भी कोर्ट को अवगत कराये।

ये तो सर्विदित है कि, कोटद्वार में पृथक तौर पर ट्रेंचिंग ग्राउण्ड के न होने वर्तमान में पूरे शहर का कूड़ा खोह नदी के सुपुर्द किया जा रहा है। पहले नगर पालिका में 11 वार्ड थे, वहीं अब नगर निगम में 40 वार्ड हैं। इसलिए अब खोह नदी के किनारे बनाये गये अस्थाई ट्रेंचिंग ग्राउण्ड में कूड़े के लिए जगह कम पड़ रही है।

आपको बता दें, इससे पहले भी Wall of kindness संस्था के अथक प्रयासों के बलबूते दुगड्डा व कोटद्वार में खोह नदी के किनारे ट्रेंचिंग ग्राउंड को कहीं और शिफ्ट किया जाने की मांग NGT द्वारा नवंंबर 2019 को स्वीकार की गई। 8 महीने गुजर गए लेकिन ट्रेचिंग ग्राउंड की स्थिति जस की तस बनी हुई है। इससे ये अंदाज़ा लगे जा सकता है कि, कहीं न कहीं कोर्ट द्वारा ट्रेंचिंग ग्राउंड को लेकर दिए गए आदेशों की अवहेलना की जा रही है।

निसंदेह, कोटद्वार निवासी सामाजिक कार्यकर्ता मनोज नेगी Wall of kindness संस्था पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार प्रयासरत है। कूड़ा निस्तारण को लेकर मनोज नेगी का कहना है कि, नगर निगम की लापरवाही व उनके द्वारा अवैध रूप से बनाये गए डंपिंग जोन, जिसमें मल-मूत्र व कई स्थानों से लाया गया कूड़ा फेंका जा रहा है। अन्यत्र फेंके जा रहे कूड़े के उचित निस्तारण को लेकर अधिवक्ता रोहित डंडरियाल ने भी उत्तराखंड अर्बन डेवलपमेंट मिनिस्ट्री के सेक्रेटरी को ये आर्डर पास किया और साथ ही रेटिएरेड चीफ जस्टिस वी.सी. ध्यानी ने कहा है कि, वह सारे के सारे घटनाक्रम को देखें और जल्द से जल्द एक ट्रेचिंग ग्राउंड कोटद्वार को उपलब्ध करवाए।

उल्लेखनीय है कि, 08 माह तक भी शासन द्वारा इस मामले पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया। पूर्व में अधिवक्ता रोहित डंडरियाल ने बताया था कि, उन्होंने 05 लोगों को नोटिस जारी किये थे। जिसमें सबसे पहले चीफ सेक्रेटरी उत्तराखंड, सेक्रेटरी अर्बन डेवलपमेंट उत्तराखंड, डीएम पौड़ी और दुगड्डा के चेयरमैन के साथ ही कोटद्वार की मेयर हेमलता नेगी, जिनके ऊपर ट्रेंचिंग जोन को शिफ्ट करवाने की अहम ज़िम्मेदारी थी।

वहीं, इस सम्बन्ध में महापौर हेमलता नेगी का कहना था कि, “हमने इस संबंध में सरकार को बार-बार पत्र भेजे, यहाँ तक की 12 दिन तक धरने पर भी बैठी, लेकिन ट्रेंचिंग के लिए भूमि उपलब्ध नहीं हो पाई। साथ ही उनका कहना था कि, प्रदेश सरकार से इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए कूड़ा निस्तारण के लिए जल्द से जल्द भूमि उपलब्ध करवाए।


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