हरदा ने किया पलटवार, बीजेपी को बताया स्टिंग बाज पत्रकार का पक्षधर

ग़ौरतलब है कि, मुख्यमंत्री रावत के खिलाफ उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच के आदेश जारी किये थे जिसके बाद कांग्रेस और विपक्षी पार्टी मुख्यमंत्री समेत भाजपा पर हमलावर हो गई थी। वहीं कांग्रेस ने गुरुवार को राजभवन कूच किया और जमकर भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने न सिर्फ राजभवन कूच के दौरान बल्कि सोशल मीडिया के जरिए भी मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत औऱ भाजपा सरकार पर निशाना साधाते हुए कहा कि, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने फेसबुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, मैं जहां आजकल रहता हूं, वहां थोड़ा एकांत है। मैं एकांत में सोच रहा था कि, सम्मानित हाईकोर्ट ने जो जजमेंट दिया अब उस जजमेंट के आलोक में इतना निश्चित है कि श्री त्रिवेंद्र सिंह जी की सरकार जानी चाहिये, क्योंकि सम्मानित हाईकोर्ट ने बहुत महत्वपूर्ण और स्पष्ट आदेश सी.बी.आई. जांच का दिया है, यदि इसके बावजूद श्री त्रिवेंद्र जी की सरकार बनी रहती है तो यह राजनीतिक बेहयाई होगी, मगर मामला यहीं पर समाप्त नहीं हो रहा है, यह तीसरी सरकार है जिसको स्टिंग का दंश झेलना पड़ा है।

आगे हरीश रावत ने कहा कि पहली सरकार डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक जी की थी, वो भी उत्तराखंड से घायल होकर के गये थे, दूसरी सरकार हरीश रावत की थी जिसको ऐसी राजनीतिक अस्थिरता झेलनी पड़ी कि राज्य के विकास और प्रशासनिक स्थिरता पर गहरी चोट पड़ गई, बल्कि उसी दिन शुरुआत हो गई कि हम 70 की विधानसभा में 11 पर आकर ठहर गये और अब श्री त्रिवेंद्र सिंह जी की सरकार है। जरा आप गहराई से विवेचना करें, क्या ये सारे कालखंड में हुये स्टिंग सार्वजनिक जीवन में स्वच्छता के पक्ष में हुये हैं या राजनीतिक बेईमानी और आर्थिक ब्लैक मेलिंग के लिये हुये हैं? सार्वजनिक जीवन में यदि पत्रकार स्टिंग करते हैं तो मैं उसका स्वागत करता हूं, मगर उद्देश्य यदि कुछ और हो तो राज्य के लिए यह स्थिति खतरनाक है। पोखरियाल जी झेल गये, हरीश रावत ने भी झेल लिया है, त्रिवेंद्र सिंह जी झेल लेंगे, झेल लेंगे चाहे कुछ घायल हो जाएं, मगर राज्य पर तो निरंतर घाव लगते जा रहे हैं।

हरीश रावत ने लिखा कि, भाजपा चाहे कितना ही हम पर दोष मढ़ने की कोशिश करें, मगर इस स्टिंग के मोंस्टर को उत्तराखंड में खड़ा करने के लिये जो लोग भी दोषी हैं, वो सब भाजपा में विद्यमान हैं और समय-समय पर भाजपा के नेताओं ने अपनी राजनीति के लिये इसका उपयोग भी किया है, आज उनके मुख्यमंत्री इस स्टिंग की चपेट में हैं, तो भाजपा फड़फड़ा रही है, मगर यह सत्य भाजपा झुठला नहीं सकती कि माननीय हाईकोर्ट का जो आदेश है, वो गंभीर है। तकनीकी आधार पर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भले ही हाईकोर्ट के आदेश के क्रियान्वयन के एक हिस्से पर रोक लगा दी है, मगर शेष आदेश तो अपनी जगह पर खड़ा है, इसलिये मुख्यमंत्री जी से नैतिक आधार पर त्यागपत्र मांगना तर्कसंगत है।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलते ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जवाब देते हुआ कहा कि तमाम तरह के षड्यन्त्र रचे जा रहे हैं। मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि हम पूरी तरह से षड्यन्त्र और भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े रहेंगे। मुख्यमंत्री ने हरदा पर पलटवार करते हुए कहा कि जब आपका स्टिंग हुआ था तब ये ब्लैकमेलर था लेकिन आज क्यों इस के साथ खड़े हैं। इस का जवाब देना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वरना इसका जवाब जनता देगी।

वहीं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बीजेपी के नेताओं के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के खिलाफ सीबीआई जांच के निर्देश दिए थे जिसके बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट गई और वहां से मुख्यमंत्री को बड़ी राहत मिली।लेकिन हाई कोर्ट द्वारा उठाए गए तमाम पहलुओं पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई स्टे नहीं दिया है,बल्कि विशेष अनुमति याचिका पर मुख्यमंत्री को स्टे दिया है।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि बीजेपी के नेताओं की ओर से बार-बार कांग्रेस पर आरोप लगाया जा रहा है कि सरकार को अस्थिर करने के लिए कांग्रेस ने साजिश रची थी। जबकि असल हकीकत यह है कि 2016 में कांग्रेस की सरकार गिराने के लिए बीजेपी ने ही उमेश शर्मा नाम के स्टिंग बाज को अपने पक्ष में कर कांग्रेस सरकार गिराने का प्रयास किया था इतना ही नहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा नैतिकता के आधार पर बीजेपी को कांग्रेस से माफी मांगनी चाहिए।


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