अच्छी ख़बर : जल्द खुलेंगे चौरासी कुटी के द्वार, एक बार फिर ओम ध्वनि से गुंजेगा वातावरण

महर्षि महेश योगी की तपो स्थली और भावातीत ध्यान योग के रचयिता रहे शंकराचार्य नगर (चौरासी कुटी) का वातावरण एक बार फिर ओमकार की मधुर और आत्म विभोर ध्वनि से गुंजायमान होगा। राजाजी टाइगर रिजर्व महर्षि की इस अमूल्य धरोहर को एक बार फिर से यहां आने वाले पर्यटकों के लिए खोला दिया जायेगा। इससे आने वाले समय में पर्यटक व योग साधक चौरासी कुटी पहुंचकर चार दशक पुराने उस दौर की अनुभूति ही नहीं, बल्कि यहां योग साधना के लिए बनी गुंबदनुमा कुटी में बैठकर योग-ध्यान और साधना का अभ्यास भी कर सकेंगे। ग़ौरतलब है कि, कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन में पर्यटकों के लिए चौरासी कुटी के द्वार बंद कर दिए गए थे।

हालांकि, अनलॉक की प्रक्रिया चालू होने के साथ ही अब धीरे-धीरे सभी प्रतिबंधित गतिविधियों को पुनः खोले जाने की कवायद शुरू हो चुकीं है। प्रपजानकारी के मुताबिक, आगामी 15 अक्टूबर से राजाजी टाइगर रिजर्व की विभिन्न रेंजों में जंगल सफारी को खोलने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही चौरासी कुटी को भी पर्यटकों के लिए खोला जा सकता है। महर्षि महेश योगी ने साठ के दशक में तीर्थनगरी ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम क्षेत्र में शंकराचार्य नगर की स्थापना की थी। योग साधना और ध्यान के लिए इस नगर में चौरासी गुंबदनुमा कुटियों का निर्माण किया गया था। जो बाद में चौरासी कुटी के नाम से भी पुकारा जाने लगा। महर्षि महेश योगी ने साठ के दशक में तीर्थनगरी ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम क्षेत्र में शंकराचार्य नगर की स्थापना की थी। योग साधना और ध्यान के लिए इस नगर में चौरासी गुंबदनुमा कुटियों का निर्माण किया गया था। वास्तुकला की अद्भुत कृतियों वाले इस नगर से महर्षि की ख्याति क्या जुड़ी कि तीर्थनगरी देखते ही देखते विदेशी पर्यटक व साधकों के लिए योग की राजधानी का स्वरुप ले लिया।

1980 दशक में यह क्षेत्र राजाजी नेशनल पार्क की सीमा में आ गया, लिहाजा 1985 में इसे बंद कर दिया गया। तीन वर्षों तक बंद रहने और प्रतिबंधित वन क्षेत्र में होने के कारण योग-ध्यान व साधना का यह अद्भुत केंद्र आम लोगों की नज़रों से ओझल ही रहा। नतीज़न, इन तीन वर्षों के अंतराल में यह पौराणिक धरोहर खंडहर में तब्दील होकर रह गई। काफ़ी समय गुजर जाने के बाद आख़िरकार दिसंबर 2015 को राजाजी टाइगर रिजर्व द्वारा चौरासी कुटी को नेचर ट्रेल व बर्ड वॉचिंग के लिए फिर से खोल दिया गया। जिसका उदेश्य मात्र यही था कि, पर्यटकों का महर्षि महेश योगी स्थली से जुड़ाव बना रहे और साथ ही यहां से जुड़े पश्चिम के मशहूर बैंड बीटल्स ग्रुप की स्मृतियों को भी नई पहचान मिल सके। हालांकि, पार्क प्रशासन की इस अनूठी पहल के उन्हें सकारात्मक नतीजे भी मिले और चौरासी कुटिया के खुलने के बाद से अब तक 22 हजार पर्यटक यहां भ्रमण कर चुके हैं।

चौरासी कुटी के आकर्षण प्रति देश-दुनिया के पर्यटकों के झुकाव के दृश्टिगत राजाजी टाइगर रिजर्व ने इस पौराणिक धरोहर को इसके मूल स्वरूप में पुनः विकसित करने की योजना तैयार की है। बस अब इंतज़ार है करीब डेढ़ करोड़ की लगत से तैयार इस योजना को उत्तराखंड ईको पर्यटन बोर्ड की ओर से हरी झंडी मिलने का। चौरासी कुटी के आकर्षण ने देश-विदेश के पर्यटकों को अपनी ओर खींचा और अब यह विरासत राजाजी टाइगर रिवर्ज की आमदनी में अहम योगदान दे रही है। कोरोना संक्रमण के चलते चौरासी कुटी को भी बंद कर दिया गया था। लेकिन, अब अनलॉक-5 में जारी नए दिशा निर्देशों की तर्ज़ पर एक बार पुनः चौरासी कुटी को पर्यटकों के आवागमन के लिए खोले जाने की योजना है।

राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक सनातन सोनकर बताते हैं कि, इस योजना के तहत शंकराचार्य नगर में निर्मित भवनों, गुंबदनुमा 84 कुटिया, योग हॉल व अन्य इमारतों का पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये बिना पुनः निर्माण और सौन्द्रीयकरण का कार्य किया जाएगा। ईको पर्यटन समिति के माध्यम से यहां योग-ध्यान की कक्षाएं संचालन भी किया जाएगा। इसके बाद यहां आने वाले पर्यटक महर्षि महेश योगी और बीटल्स के उस दौर को पहले की भांति अनुभूति करने के साथ योग-ध्यान और साधना का अभ्यास भी कर सकेंगे। चौरासी कुटिया महर्षि महेश योगी और भावातीत ध्यान के कारण ही नहीं, प्रसिद्ध अमेरिकन म्यूजिकल ग्रुप बीटल्स के कारण भी चर्चाओं में रही। इस ग्रुप के चार सदस्य जॉन लिनोन, पॉल मेकार्टनी, जार्ज हेरिशन व रिगो स्टार वर्ष 1967-68 में पूरे एक साल इस केंद्र में रहे और भावातीत ध्यान की दीक्षा ली। बीटल्स ग्रुप के इन सितारों ने यहां रहते हुए कई यादगार धुन भी रचीं।


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