उत्तराखंड में लगभग 10 हज़ार पेड़ कटने की कगार पर

उत्तराखंड अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। उत्तराखंड में बहने वाली नदियां पहाड़ और हरे भरे वृक्ष ही उत्तराखंड की पहचान है। लेकिन आज इन वृक्षों को काटने की योजना बनाई जा रही है। आपको बता दें, देहरादून के जॉली ग्रांट हवाई अड्डे के व्यापक विस्तार के लिए लगभग 87 हेक्टेयर जमीन को वन विभाग एयरपोर्ट अथॉरिटी को देने जा रहा है, जिसका प्रपोज़ल बना कर भी भेजा जा चुका है।

इस एरिया में लगभग में 9 हज़ार पेड़ पौधे आते है। जिनको अब विकास के नाम पर काट दिया जायेगा। निसंदेह पर्यावरण पर इसका सीधे तौर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। लेकिन ये क्षेत्र कई जंगली जानवरो का वर्षो पुराना घर भी है। जो कि अब हमारे स्वार्थ और सुविधाओं की भेंट चढ़ाये जाने की ओर अग्रसर है। अब सबसे बड़ा हुए अहम सवाल ये उठता है कि जिन्हें हमारी सुख सुविधाओं की ख़ातिर बेघर किया जा रहा है, क्या हमारा उन बेजुबान जानवरो के प्रति कोई दायित्व नहीं बनता कि उन्हें बेघर होने से बचा सकें।

अगर आपको याद हो तो, करीब एक साल पहले मुंबई में भी कुछ ऐसी तरह का इंसिडेंट हुआ था। जिसमे BMC के द्वारा पेड़ काटे जाने के खिलाफ सैकड़ों लोगो ने ह्यूमन चैन बनाई थी। जिसके बाद BMC ने भारी संख्या में विरोध प्रदर्शन के आगे विवश होकर पेड़ काटने का फैसला छोड़ दिया था। आज उत्तराखंड के लोगों को भी कुछ इसी तरह की मुहीम चलानी होगी ताकि, जियो और जीने दो की पंक्तियों को एक बार फिर हम सार्थक कर पाएं। जिससे हमारी धरोहर सुरक्षित रह सके।


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