आप पार्टी का बिजली का कमजोर झटका प्रदेशवासियों पर बेअसर-देवेश आदमी

आप पार्टी का बिजली का कमजोर झटका प्रदेशवासियों पर बेअसर-देवेश आदमी

रिखणीखाल। रिखणीखाल निवासी देवेश आदमी ने कहा कि बिजली का झटका कभी कमजोर नही होता किंतु जब बिजली की धारा मुहं से प्रवाहित होती है तो झटका कमजोर हो जाता हैं।
रिखणीखाल निवासी देवेश आदमी ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने बिना सोची समझी रणनीति के तहत उत्तराखण्ड में बिजली का मुद्दा उठाया हैं जिसके लिए उन्होंने उत्तराखण्ड में विधुत उत्त्पादन के आंकड़ें नहीं खंगाले फिर आयात निर्यात को समझने में भारी चूक करते हुए खपत की क्षमता जाने बिना ही फ्री बिजली 24 घण्टे आपूर्ति की घोषणा कर दिया। आखिर में समूचे प्रदेश में विद्युत आपूर्तिकर्ता पर बात टिकी तो वह भी उत्तराखण्ड थर्मल पॉवर कॉर्पोरेशन ही निकला। यानी प्रदेश की बिजली प्रदेश में ही खपत होगी। न निर्यात न आयात तो फिर आर्थिक नुकसान होने की पूरी गारंटी हैं और पूर्ति कैसे होगी यह सोचनीय विषय हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 तक प्रदेश में विद्युत उत्पादन और खपत में लगभग तीन गुने का अंतर आ गया था। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड यूजेवीएनएल वर्तमान में सभी 12 परियोजनाओं से करीब 11.79 मिलियन यूनिट एमयू बिजली का उत्पादन कर रहा है, जबकि प्रदेश में बिजली की खपत 35 एमयू तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कुछ परियोजना ऐसे हैं जिन का निर्माण से पूर्व का अनुबंध अभी पूरा नही हुआ जिस कारण उन के उत्त्पादन का बहुत सूक्ष्म हिस्सा प्रदेश को मिल रहा हैं। उन्होंने कहा कि यदि पड़ोसी राज्यों में आम आदमी पार्टी की सरकार नही आई और उत्तराखण्ड में आम आदमी की सरकार आ गई तो विद्युत आपूर्ति कैसे होगी। केन्द्र से खींचातानी के चलते बिजली आपूर्ति संभव नही। पहाड़ी राज्य को मिल रहा अतिरिक्त वित्त भी काम नही आएगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल उत्तराखंड पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड यूपीसीएल केंद्रीय पूल से करीब 9 एमयू बिजली ले रहा है। बाकी बिजली यूपीसीएल निजी कंपनियों से खरीद कर किसी तरह आपूर्ति कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे में आम आदमी पार्टी का बिजली करंट जानकारों के गले नही उतर रहा। फ्री की वस्तु का कभी सही इस्तेमाल नही होता लोग 300 यूनिट बिजली फूंकना अपना अधिकार समझेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों को यदि बिजली मुफ्त मिलेगी तो गलत स्तेमाल होगा और राज्य पर वित्त भार पड़ने से पूर्व सभी को अनैच्छिक पॉवर कटौती का सामान करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान इन 35 एमयू की खपत है यह 3 गुना तक बढ़ सकती हैं। इससे हालात इस तरह बिगड़ सकते हैं यदि हम बिजली खरीदते हैं तो हमें बिजली देगा कौन प्रदेश आपदाओं का कुण्ड बन गया हैं, नई विधुत परियोजना का बोझ भी नही झेल सकता हैं। उन्होंने कहा कि परमानु संयंत्र व टर्बाइन पहाड़ों में लगाना खतरे से खाली नही तो आपूर्ति संभव नही। बिजली फ्री नही होनी चाहिए सब्सिडी के साथ मिलें कुछ यूनिट की सब्सिडी होनी चाहिए परिवार की आर्थिक स्थिति के अनुसरा यह योजना हो। उन्होंने कहा कि हर नया पुराना मीटर आधारकार्ड से जोड़ा जाए ताकि सही से आर्थिक आंकलन किया जाय। कुछ दुरस्त क्षेत्रों के लिए घरेलू बिजलीं में फ्री यूनिट बढ़ाये जा सकते हैं शहरी क्षेत्रों व तराई के ग्रामीणों का पूरा ध्यान रख बिजली की आपूर्ति कम से कम 20 घण्टे रखे जाय। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी यदि प्रदेश की हालत सुधारना चाहती हैं तो शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार, स्वरोजगार पर जोर देती आम आदमी पार्टी को नशामुक्ति पर ध्यान देना चाहिए पहाड़ों में स्वरोजगार का मॉडल तैयार करने की बात करनी चाहिए। तकनीकी शिक्षा कल सेक्टर की स्थापना व बंद पड़े उद्योगों को खोलने की बात होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक नीति भू कानून चकबन्दी वन अधिकार कानून गैरसैंण स्थाई राजधानी जैसे मुद्दों पर राजनीति करनी चाहिए जिस से हर व्यक्ति को सीधा फायदा होगा। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में वर्तमान विद्युत स्थित विगत 8 से 10 वर्षों से बहुत बेहतर हैं, विद्युत निजीकरण से बिलों में इजाफा तो हुआ पर पॉवर कट की समस्या से निजात मिली हैं अंतिम गाँव के अंतिम व्यक्ति को बिजली उपलब्ध हो रही हैं। उन्होंने कहा कि लोग बिजली से नही बेरोजगारी भुखमरी नशाखोरी से जूझ रहे हैं जिस पर कोई भी व्यक्ति राजनीति नही करना चाहता जिस के बारे में सोचने का किसी भी सरकार के पास समय नही हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी भी इस भेड़चाल में शामिल हो गई और बिना रिसर्च ल्लिडब्लपमेंट के बिजली का मुद्दा उठा दिया जबकि असल आवश्यकता बेरोजगारी हैं पलायन अपराध का हल बेरोजगारी हैं इस के लिए उक्त में दिए गए सुझाव अमल में लाने होंगे। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में बिजली फ्री का पैंतरा तो सतपाल महाराज का पैरों की मसाज व त्रिवेन्द्र सिंह रावत का घस्यारी योजना की तरह हैं इन से आम व्यक्ति को कोई सरोकार नही हैं न यह आम व्यक्ति के समझ में आएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान जरूरत और भविष्य की गेमचेंजर के तौर पर कोई नही सोच रहा हैं, बेरोजगारी का हल प्रदेश में हैं। सिंगापुर बैंकॉक या दिल्ली में समस्या का हल नही मिलेगा। जहां समस्या होती हैं हल वहीं होता हैं इस लिए तरीकें बदलें व्यवस्था बदलें।

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