आशा का एक नया दिन

आशा का एक नया दिन
कदम रुकते नहीं मेरे
मंजिल की ओर बढ़ते समय
सांसे थमती नहीं ,मेरी
कोशिश करते समय ।
गिरती हूं ,भटकती हूं
झुकती हूं,खोजती हूं
पर हिम्मत नहीं टूट पाती है,मेरी
सपना झुक नहीं पाती है,मेरी
ताने मिलते है,मुझे
सारे दर्द सह लेती हूं
बाद में मैं ही गलत कहलाती हूं।
लोगों का कहना है, कि
कोयला नहीं बन सकता है ,हीरा
रगड़ा है,जिसने खुद को
वो बन जाता है ,कुदरत का हीरा।
मेहनत करना है ,तब तक
जब तक कि
पा ना लु
उस मंजिल को
हौसला तोड़ेंगे लोग
पर हिम्मत बुलंद होगी मेरी
पा लूंगी उस मंजिल को
अपने संघर्ष से

काजल साह


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