फिल्म सिटी के निर्माण के साथ-साथ बेसहारा व बेरोजगारों के कल्याण पर भी ध्यान दे योगी सरकार- अधिवक्ता आर के पाण्डेय

सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सपनों की नगरी मुम्बई की ही तरह यूपी में भी फिल्म सिटी बनाये जाने का ऐलान किया जा चुका है, जिसकी स्थापना के लिए जगह का भी चुनाव कर दिया गया है। दरसअल, हाल ही में योगी सरकार ने यमुना एक्सप्रेसवे के पास एक भव्य फ़िल्म सिटी बनाने का निर्णय लिया है, इसे लेकर फ़िल्म जगत के जानें-मानें हस्तियों के साथ बैठक कर जगह का भी चुनाव कर लिया गया है।

लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सरकारी बंगले पर बैठक का आयोजन किया गया, इस बैठक में फ़िल्मी जगत के कई नामी हस्तियों ने इस वीडियो कॉन्फ़्रेंस में प्रतिभाग किया । वहीं, इस मौके पर सीएम योगी ने कहा कि यह राम की अयोध्या, कृष्ण की मथुरा, शिव की काशी के साथ ही बुद्ध, महावीर और कबीर की धरती भी है, उत्तर प्रदेश अब इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पूरे देश को फ़िल्म सिटी के रूप में एक और तौफ़ा देने जा रहा है। वहीं, सीएम योगी के इस निर्णय पर समाजसेवी व हाई कोर्ट इलाहाबाद के अधिवक्ता आर के पाण्डेय ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि, योगी सरकार को कलाकारों के साथ-साथ निर्धन किसान, बेरोज़गार नौजवान और बेसहारा व असहाय हो चुके लोगों के बारे में भी मंथन किये जाने की आवश्यकता है।

ग़ौरतलब है कि, योगी सरकार यूपी में फ़िल्म सिटी बनाने की कार्य योजना तैयार कर रही है। तो ऐसे में समाजसेवी व अधिवक्ता आर के पाण्डेय ने कहा कि सरकार की यूपी में फ़िल्म सिटी बनाने को लेकर लिए गए निर्णय निसंदेह प्रभावशाली हो, लेकिन सरकार को चाहिए कि इस कार्य योजना का लाभ किसी एक वर्ग व जाति विशेष तक ही सीमित न होकर राज्य में नीचे तबके के वे लोग जो आज तक गरीबी में जीवन व्यापन कर रहे है, बेसहारा और निर्धन हो चुके किसानों, बेरोजगारी की मार से गुजर रहे युवाओं के जीवन को कैसे बेहतर बनाया जा सके।

उन्होंने आगे ये भी कहा कि उत्तर प्रदेश तो पहले से ही एक किसान प्रदेश रहा है जिसके दम पर पूरे देश को जीवन यापन हेतु अनाज उपलब्धहोता आया है। कहा कि, आज भले ही प्रदेश का किसान सरकारी की नीतियों की भेंट चढ़ चुका हो लेकिन इन सबके बीच उत्तर प्रदेश दुग्ध, फल व अनाज के उत्पादन में आज भी शीर्ष स्थान पर काबिज़ है और इतना ही नहीं राज्य के राजस्व को बढ़ाने में भी कृषि क्षेत्र का अहम् योगदान रहा है। दुर्भाग्य की बात तो ये है कि, राज्य के विकास में समर्पित किसान आज भी पूर्व में सत्तासीन रही सरकारों की ही तरह वर्तमान सरकार की उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं।


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