जिंदगी का सफर

ज़िंदगी का सफ़र बस चलते जाने का नाम है,
कर्मपथ पर बढ़े चलो,रुकना मौत का काम है।
वसन की भाँति पल पल रँग बदलता है ये जीवन,
कभी घटा घनेरी दु:ख की,कभी शीतल शाम है।
मिलना बिछड़ना भी इस सफर का अंग है,
कितने अपने छूट जाते,जीवन के भी अजीब रंग है।
जीना हर हाल में होता है हम सबको,
मनचला मौत भी चलता इसके संग है।
इस सफर के यात्री भले ही हम सभी हैं ,
पर सफ़र में पहचान मिलती सबको नहीं है।
ईश्वर प्रदत्त इस जीवन को तुम महान बनाओ,
कर्म का थाम के दामन,जग में नाम कमाओ।

रीमा सिन्हा(लखनऊ)


शेयर करें

सम्बंधित ख़बरें

टीका - टिप्पणी