कविताओं, कहानियों व चित्रों का विशेषांक

सैनिक तू अनमोल है

जब हम अपनों को
कोई मैसेज करते हैं
रिप्लाई नहीं आता
तो हम कितना डरते हैं ।

सोचिए फिर जरा
सैनिक के परिवारों का
जहाँ नेटवर्क नहीं हैं
वहाँ सैनिक वो फँसे हैं
कहाँ से वो फोन करेंगे
कैसे रिप्लाई करेंगे
वो सीमा पर डटे हैं
और घर वाले कैसे
रहते होंगे ।

करवा चौथ में देखो
हम कहते हैं हमदम से
पानी हम पियेंगे
हाथ से अपने सनम के।

क्या सैनिक की पत्नी की
ऐसी ख्वाहिश न होगी
कि साजन होते घर में
पिलाते हाथ से पानी
रहते हर पल संग में ।

पर त्याग तो उनका देखो
जो फोटो देख के उनकी
उपवास तोडती है ।
सदा सुहागन रहूँ
वो हाथ जोडती हैं ।

अपने बच्चों का बचपन
देखने को तरसे
मीठी तोतली भाषा
सुनने को सैनिक तरसें ।

माँ हर बेटे की आवाज
में अपना बेटा ढूँढे
कितना त्याग करते हैं
सैनिक और उनके घरवाले
सैल्यूट तुम्हें है ऐ
मेरे देश के रखवाले

त्याग बडा उस माँ का
जिसने कलेजे का टुकड़ा
देश के नाम किया है
धन्य है वो बेटी
जिसने अपने सुहाग को
वतन को सौंप दिया है।

तेरे त्याग का तो
कोई भी मोल नहीं है
मेरे देश के सैनिक तुझसे
बढके कोई अनमोल नहीं है ।
हाँ कोई अनमोल नहीं है ।

आरती कण्डवाल


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