तुम मुमताज तो बनो…

हम फिर ताज महल बनवा देंगे,

तुम मुमताज तो बनो
हम फिर ताज महल बनवा देंगे,
तुम मुमताज तो बनो… !
हम चांद जमीन पर ले आएंगे,
तुम चांदनी तो बनो… !

सफ़र-ए-मोहब्बत…..
हम रोते को हंसा देंगे,
पतझड़ को बसन्त बना देंगे,
सिसकते अश्कों से,
राही बन मुस्कायेंगे……
इस बेसहारे का,
तुम सहारा तो बनो….!
हम मर जाएंगे बे मौत,
तुम बस कातिल तो बनो.. !!

और…
हम प्रेम का बंजर खेत लहलहा देंगे,
तुम चाहत की एक मिसाल तो बनो… !
जीवन पर्यंत राह निहारेंगे हम,
तुम बस लौट आने की,
उम्मीद तो बनो.. !!
-सुशील रस्तोगी


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