आनंद ने मां को याद कर सुनाई अपने पहले ओलंपियाड की कहानी

आनंद ने मां को याद कर सुनाई अपने पहले ओलंपियाड की कहानी
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चेन्नई ,09 मई । पांच बार के विश्व शतरंज चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने मदर्स डे पर अपनी मां के बारे में एक कहानी साझा करते हुए उन्हें याद किया।
भारतीय ग्रैंडमास्टर आनंद की मां सुशीला आनंद ने उन्हें शतरंज से रूबरू कराया और उनके दिल में इस खेल के लिए प्रेम जगाया। जब आनंद ने शतरंज प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया तो उनकी मां उनके साथ जाया करती थीं और यह सुनिश्चित करती थीं कि उनका ध्यान खेल से न भटके।
आनंद ने अपनी मां की इसी आदत से जुड़ी 1984 में यूनान के थेसालोनिकी में हुई एक घटना साझा की। वह उस समय 14 साल के थे। उन्होंने कहा , मैंने एक साल पहले ही अपनी अंतरराष्ट्रीय रेटिंग हासिल की थी और मैं ओलंपियाड में सारे बड़े खिलाडिय़ों को देखकर चकित रह गया था।
आनंद ने बताया कि सोवियत संघ तब अनातोली कारपोव और गैरी कास्परोव की अनुपस्थिति के बावजूद अपराजेय था। उन दिनों शतरंज सामग्री और खेलों तक पहुंच बहुत सीमित थी और एकमात्र स्रोत अलेक्जेंडर मटानोविक और मिलिवोजे मोलेरोविक द्वारा स्थापित चेस इन्फोर्मेंट था जिसने एक या दो संस्करणों में एक वर्ष में खेले जाने वाले सभी शीर्ष खेलों की सूचना प्रकाशित की थी।
आनंद ने कहा, उस समय, मेरी इच्छा थी कि मेरा कम से कम एक खेल इन्फोर्मेंट में प्रकाशित हो। मुझे याद है कि एक बार कार्यक्रम स्थल पर मैं अपनी माँ को दिखाने के लिए इन्फोर्मेंट के प्रभारी व्यक्ति की ओर इशारा कर रहा था। मेरे मैच के लिए जाने के बाद, माँ ने जाकर प्रभारी व्यक्ति से मुलाकात की और कहा कि वह चाहती हैं कि उनके बेटे का एक खेल इन्फोर्मेंट में प्रकाशित हो।
प्रभारी ने बताया कि कई खिलाडिय़ों ने अपने खेलों को इन्फोर्मेंट में शामिल करने का अनुरोध किया था, लेकिन यह पहली बार था कि एक माँ ने आकर अपने बेटे के खेल को शामिल करने की सिफ़ारिश की हो, और वह मना नहीं कर पाये!

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