जनता के राष्ट्रपति और मिसाइल मैन अब्दुल कलाम की जयंती पर जाने कुछ ख़ास बातें

भारत रत्न, भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित, अवुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम, यानी कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की आज (गुरुवार) को जयंती है। आज ही के दिन रामेश्वरम में 15 अक्तूबर, 1931 को जन्में जिन्हें मिसाइल मैन और जनता के राष्ट्रपति के नाम से जाना जाता है। कलाम भारतीय गणतंत्र के 11वें राष्ट्रपति के साथ उच्च कोटि के वैज्ञानिक और इंजीनियर के रूप में विश्व विख्यात थे।

उन्होंने लोगों को सही मायने में जीना सिखाया, वे कहते थे कि, सफ़ल व्यक्ति वही होता है जो जीवन में चाहें कितनी भी विकट परिस्थिति क्यों न आन पड़े, बावजूद इसके वो अपने सपने के पीछे दौड़ना नहीं छोड़ते। उन्हें पूरा कर लेने का वो पक्का इरादा ही उन्हें जीवन में आने वाली उलट परिस्तिथियों का सामना करने की हिम्मत देता है। कलाम के प्रोत्साहन से लबरेज़ उनके यही विचार आज भी युवा पीढ़ी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। और आगे भी करते रहेंगे।

15 अक्टूबर 1931 को धनुषकोडी गाँव (रामेश्वरम) में एक मध्यमवर्ग मुस्लिम अंसार परिवार में इनका जन्में कलाम के पिता जैनुलाब्दीन न तो ज़्यादा पढ़े-लिखे थे, और न ही उनकी आर्थिक स्तिथि ज़्यादा ठीक थी। इनके पिता मछुआरों को नाव किराये पर दिया करते थे। बस इसी से परिवार का गुजर बसर चला करता था।

संयुक्त परिवार में रहने पर अब्दुल कलाम के परिवार की सदस्य संख्या का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि, कलाम खुद पाँच भाई एवं पाँच बहन थे और घर में तीन परिवार रहा करते थे। अब्दुल कलाम के जीवन के प्रथम शिक्षक उनके पिता ही थे, जिनका उनपर बहुत गहरा प्रभाव रहा। कलाम के पिता भले ही पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन पैसों की तंगी और इतने बड़े परिवार की जिम्मदारियों का भली भांति निर्वहन करना और उनके दिए संस्कार आगे चलकर अब्दुल कलाम के बहुत काम आए। पाँच वर्ष की अवस्था में रामेश्वरम की पंचायत के प्राथमिक विद्यालय में उनकी शिक्षा-दीक्षा हुई थी।

1972 के दशक में वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से जुड़े। अब्दुल कलाम को परियोजना महानिदेशक के रूप में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह (एस.एल.वी. तृतीय) प्रक्षेपास्त्र बनाने का श्रेय हासिल हुआ। 1980 में इन्होंने रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के निकट स्थापित किया था। इस प्रकार भारत ने भी अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब सदयस्ता हांसिल की।

यूं तो अब्दुल कलाम राजनीतिक क्षेत्र के व्यक्ति नहीं थे लेकिन राष्ट्रवादी सोच और राष्ट्रपति बनने के बाद भारत की कल्याण संबंधी नीतियों के कारण इन्हें कुछ हद तक राजनीतिक दृष्टि से सम्पन्न माना जा सकता है। इन्होंने अपनी पुस्तक इण्डिया 2020 में अपनी विचारधारा का वर्णन किया है। यह भारत को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बनते देखना चाहते थे।

कलाम कर्नाटक भक्ति संगीत हर दिन सुनते थे और हिंदू संस्कृति में विश्वास करते थे। इन्हें 2003 व 2006 में “एमटीवी यूथ आइकन ऑफ़ द इयर” के लिए नामांकित किया गया था।साल 2011 में आई हिंदी फिल्म, आई एम कलाम में, एक गरीब लेकिन उज्ज्वल बच्चे पर कलाम के सकारात्मक प्रभाव को परदे पर उतरा गया। इस फ़िल्म की ख़ास बात ये रही कि, उनके सम्मान में वह बच्चा छोटू जो एक राजस्थानी लड़का है खुद का नाम बदल कर कलाम रख लेता है।

27 जुलाई 2015 की शाम अब्दुल कलाम भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलोंग में ‘रहने योग्य ग्रह’ पर व्याख्यान के दौरान उन्हें जोरदार दिल का दौरा पड़ा और वे बेहोश हो कर गिर पड़े। लगभग 6:30 बजे गंभीर हालत में इन्हें बेथानी अस्पताल में आईसीयू में भर्ती किया गया और दो घंटे के बाद खबर आई कि, कलाम नहीं रहे। कलाम अक्टूबर 2015 में 84 साल के होने वाले थे।

मृत्यु के तुरंत बाद कलाम के शरीर को भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर से शिलांग से गुवाहाटी लाया गया। जहाँ से अगले दिन 28 जुलाई को पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का पार्थि‍व शरीर मंगलवार दोपहर वायुसेना के विमान सी-130जे हरक्यूलिस से दिल्ली लाया गया। लगभग 12:15 पर विमान पालम हवाईअड्डे पर उतरा। सुरक्षा बलों ने पूरे राजकीय सम्मान के साथ कलाम के पार्थिव शरीर को विमान से उतारा। वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल व तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने इसकी अगवानी की और कलाम के पार्थिव शरीर पर पुष्पहार अर्पित किये।

तिरंगे में लिपटे कलाम के पार्थि‍व शरीर को पूरे सम्मान के साथ, एक गन कैरिज में रख उनके आवास 10 राजाजी मार्ग पर ले जाया गया। जहाँ पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित अनेक गणमान्य लोगों ने इन्हें श्रद्धांजलि दी। यही नहीं, भारत सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति कलाम के निधन के मौके पर उनके सम्मान के रूप में सात दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की। 30 जुलाई 2015 को पूर्व राष्ट्रपति को पूरे सम्मान के साथ रामेश्वरम के पी करूम्बु ग्राउंड में दफ़ना कर दिया गया।

भारत रत्न डॉ.ए.पी.जे अब्दुल कलाम, एक महान वैज्ञानिक, युवा पीढ़ी के मार्गदर्शक, मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति, की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन। परमाणु शक्ति के क्षेत्र में दिए उनके अतुलनीय योगदान को देश हमेशा याद रखेगा।


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