नहीं रहे केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान, 74 साल की उम्र में दिल्ली में निधन

भारतीय राजनीति के प्रखर वक्ता, लोकप्रिय राजनेता, कुशल प्रशासक, मजबूत संगठनकर्ता और बेहद मिलनसार व्यक्तित्व के धनी केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान अब हमारे बीच नहीं रहे, उनका आज (गुरुवार) को दिल्ली में निधन हो गया है। वे 74 वर्ष के थे। उनके देहांत की ख़बर उनके बेटे चिराग पासवान ने ट्वीट कर दी।

मिली जानकारी के मुताबिक, लोक जनशक्ति पार्टी के नीवधारक और संरक्षक रामविलास पासवान की कुछ दिन पहले ही दिल्ली के एक अस्पताल में हार्ट की सर्जरी हुई थी।

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान पिछले कुछ दिनों से बीमार थे और दिल्ली के एस्कॉर्ट हॉस्पिटल में भर्ती थे। पिता रामविलास पासवान के निधन के बाद चिराग ने ट्वीट किया- पापा….अब आप इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन मुझे पता है आप जहां भी हैं हमेशा मेरे साथ हैं। मिस यू पापा।

केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान का पिछले करीब एक महीने से दिल्ली के अस्पताल में उपचार चल रहा था। बीते 2 अक्टूबर की रात एम्स में उनकी सर्जरी की गई थी। बताया जा रहा है कि, यह पासवान की दूसरी हार्ट सर्जरी थी।

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान पहली बार 1969 में बिहार विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए थे। साल 1977 में वे पहली बार हाजीपुर लोकसभा सीट के लिये चुने गए थे और उनकी यह जीत विश्व रिकार्ड के रूप में दर्ज हुई थी। दोनों ही बार उन्होंने हाजीपुर लोकसभा सीट पर यह रिकॉर्ड बनाया। पासवान हाजीपुर सीट से 8 बार सांसद रहे।

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की आकस्मिक मृत्यु से भारतीय राजनीति के लिए अपूर्णीय क्षति है, वे पक्ष हो या विपक्ष सभी के चहेते थे। पासवान ने कभी भी कूटनीति से भरी राजनीति नहीं की, वे एक सौम्य और सच्चे व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति थे। उन्होंने जीवनपर्यन्त दलित और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए आवाज उठायी है और बात की है।

अगर वाकई में किसी को सही मायने में राजनीति का मतलब जानना हो तो पासवान का इतिहास उठा कर देख ले। कुल मिलकर अगर कहा जाये तो वे राजनीति के बड़े हस्ताक्षर थे। राजनीति को एक नए आयाम देने वाले केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान जैसे नेता बिरले ही जन्म लेते हैं।


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