पहाड़ की आवाज़ आरजे काव्य ने दिया इस्तीफ़ा

आरजे काव्य ने रेड एफएम के माध्यम से उत्तराखंड की संस्कृति को बढ़ावा देने हेतु काम करते रहे हैं। वहीं इस बीच, देहरादून में अल सुबह गूंजने वाली आवाज़ जिसका हर उत्तराखंडवासी को बेसब्री से इंतज़ार रहता है, अब हुईं सुनाई देगी। मतलब, मशहूर रेडियो जॉकी काव्य ने रेड एफएम से इस्तीफ़ा दे दिया है। इन तीन सालों में काव्य ने अपनी आवाज़ के जरिये RED FM को हर उत्तराखण्डी तक पहुँचाया है। उनके प्रसारण को देखने वालों की संख्या लाखों में है।

काव्य का RED FM सफ़र :

साल 2008 में काव्य ने अपने रेडियो जॉकी के सफ़र का आगाज़ जोधपुर दैनिक भास्कर ग्रुप के MyFM के साथ किया। इसके बाद उन्होंने साल 2010 में Red FM के लिए काम करना शुरू कर दिया। कानपूर, जयपुर, कोलकाता, दिल्ली के बाद 3 साल पहले काव्य को देहरादून में Red FM जमाने का जिम्मा सौंपा गया। काव्य Red FM में अपने क्रियान्वयन तरीकों के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने ‘एक पहाड़ी ऐसा भी’ शो को नई पहचान दी और अब अपने यू-ट्यूब चैनल उत्तर का पुत्तर के जरिए पहाड़ की बातें भी दर्शकों से साझा कर उत्तराखंड को गौरवान्वित किया। उनके इस कार्यक्रम ने उत्तराखंड ही नहीं अपितु पूरे देश को अपनी ओर आकर्षित किया। उन्होंने पलायन की मार झेल रहे उत्तराखंड के गांव और क़स्बों की बहाली के लिए “Ghost Village नहीं Dost Village” के जरिये रिवर्स माइग्रेशन को भी बढ़ावा दिया। काव्य ने अपने यू-ट्यूब चैनल, उत्तर का पुत्तर के जरिए पहाड़ की लोकसंस्कृति, लोककलाकारों को एक न्य मंच और पहचान देने में अहम भूमिका अदा की है।

आज काव्य के सोशल मीडिया पर 3 लाख़ से अधिक फैंस फॉलोवर्स हैं। इसके अलावा 21 देशों से उत्तराखंड के लोगों का उनसे जुड़ाव काबिज़ है। बता दें, काव्य साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय निर्वाचन आयोग के ब्रांड अम्बेस्डर भी रहे हैं।

RED FM छोड़ने का कारण :

Red FM चैनल सूत्रों की मानें तो, Red FM में शुरुवात में जब काव्य को अपने हिसाब से काम करने की पूरी आज़ादी दी गई तो काव्य अक्सर पहाड़ों के विषयों पर अपनी आवाज़ को बुलंद करने लगे। बस यही बात कम्पनी प्रबंधन के गले नहीं उतर रही थी। कमाल की बात तो ये रही कि, काव्य ने Red FM को जन जन तक पहुँचाने और उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और कई कलाकारों को नयी पहचान दिलाने के बावजूद उन्होंने काव्य के इस तरह से काम किये जाने पर एतराज जताया। जानकार बताते हैं कि, धीरे-धीरे कंपनी प्रबंधन ने काव्य के सोशल मीडिया हैंडल्स पर तांक-झांक शुरू कर दी। काव्य द्वारा पहाड़ को लेकर किये जा रहे उनके कार्यों पर अटकलें लगनी शुरू हो गयी। आलम ये हो गया था कि, काव्य जब भी पहाड़ को लेकर कोई वीडियो बनाते और शेयर करते तो उन्हें कम्पनी मैनजमेंट के हवाले से नोटिस तक आने लगे। हालाकिं, काव्य ने इस प्रकार के नोटिस को लेकर मैनेजमेंट से बात भी की लेकिन उन्हें अपनी कही बातों का संतोषजनक और स्पष्ट जवाब नहीं मिला।

आख़िरकार, विवश होकर पहाड़ की आवाज़, काव्य ने बीते 06 अक्टूबर को Red FM से इस्तीफ़ा दे दिया। और 08 अक्टूबर को कम्पनी मैनेजमेन्ट द्वारा उनके इस्तीफ़े पर पक्के यौर पर मुहर लगा दी गई। हालाँकि एक निजी चैनल द्वारा पूछे जाने कि, अब आगे कैसे और क्या पर काव्य ने अपनी आगे की कार्ययोजना का फ़िलहाल खुलासा नहीं किया है।


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