सरसों तेल व चावल के बढ़ते दामों ने बिगाड़ा किचन का स्वाद…

नई दिल्ली। सब्जियों का राजा कहे जाने वाला आलू फिलहाल नई फसल आने से इसकी कीमतों में गिरावट आई है। प्याज में भी मंदे का रुख है। दूसरी ओर खाद्य तेलों ने कीचन का स्वाद बिगाड़ रखा है। चावल भी बढ़ता ही चला रहा है। जिससे आम आदमी को इस कोरोना काल में महंगाई से अत्यधिक दो-चार होना पड़ रहा है।
उपलब्ध आंकड़ों को देंखे तो गत दो-तीन में अधिकांश जिंसों में तेजी ही दर्ज की गयी है। खाद्य तेलों में सरसों तेल जो जुलाई में 105 रुपए था व नया साल आते-आते 31 दिसम्बर को 210 रुपए तक पहुंच गया है। इस तरह इसमें 85/90 रुपए लीटर की तेजी दर्ज की गयी है। इसी तरह अन्य तेलों में रिकॉर्ड तेजी दिखाई दी है। इस तेजी से आम उपभोक्ताओं की रसोई का जायका बिगड़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसी तेजी का मुख्य कारण बेमौसमी बारिश और शीत लहर से राज्यों में इसकी फसल को नुकसान होना बताया गया है। इससे आगे भी सरसों तेल और आलू जैसी रोजमर्रा की वस्तुओं में तेजी ही रहेगी। जिससे महंगाई और बढ़ने की आशंका है। वहीं दूसरी ओर अमरीका, अर्जेन्टीना व ब्राजील सोया तेल की आपूर्ति बाधित होने से इसमें भी रिकॉर्ड तेजी के आसार नजर आ रहे हैं। पाम ऑयल में भी कमोबेश यही हालात हैं, क्योंकि इंडोनेशिया और मलेशिया में बाढ़ से इसकी फसल को अत्यधिक क्षति हुई है। चावलों में भी अभी तेजी ही नजर आ रही है क्योंकि वियतनाम में इसकी कीमतें नई ऊंचाई छू रही हैं और वह भी भारत से आयात करने लगा है। वैश्विक तेजी के चलते दलों में यही नजारा देखने को मिल रहा है। खाद्य तेलों में भारत विदेशों पर ज्यादा निर्भर रहता है। सोया तेल में वह ब्राजील, अर्जेन्टीना, पाम तेल में वह इंडोनिशया व मलेशिया और सूरजमुखी तेल में यूक्रेन व रूस पर निर्भर रहता है। आलू फिलहाल 20/20 रुपए किलो, प्याज 35/40 रुपए किलो है जबकि टमाटर अभी 50/60 रुपए किलो के उच्चस्तर ही बोला जा रहा है।


शेयर करें

सम्बंधित ख़बरें

टीका - टिप्पणी