उत्तराखण्ड स्थापना दिवस पर विशेष: क्या पाया क्या खोया

आज 9 नवम्बर को उत्तराखण्ड बीस वर्ष का हो गया हमने इन बीस वर्षों में क्या पाया यह विचारणीय प्रश्न है। वैसे हमने बोलने या अभिव्यक्ति की आजादी पायी। कार्य करवाने की सुगमता हुई। लेकिन जिस तीव्र गति से राज्य का विकास होना चाहिए था वह कही भी धरातल पर नहीं दिख रहा है। ऐसा लगता है जैसे राज्य अपनी मूल धारणा से भटक गया हो। लगभग दोनो राष्ट्रीय पार्टीयों ने एक एक दशक राज्य की बागडोर संभाली है लेकिन दोनों पार्टियों के कार्यकाल में कुछ विशेष राजय को नहीं मिला। राजय को अगर दोनो पार्टियों चाहती तो पलायान रोकने के लिए ब्लॉक स्तर पर कुटीर उद्योग की स्थापना कर सकती थी हमने इन बीस वर्षों में बहुत कुछ खोया सर्वप्रथम शहीद राज्य आंदोलनकारियों की भावना के अनुसार राजय को सही दिशा नहीं मिल पाई। हम भ्रष्टाचार एवं ब्यूरोके्रसी पर अंकुश नहीं लगा पाये। हमे राज्य को सही दिशा देने के लिए संकल्प लेना होगा कि ग्राम स्तर से उच्च स्तर तक किसी भी तरह का भ्रष्टाचार नहीं होने देगे। अभी भी समय है कि किस तरह इस बीच वर्ष के युवा राज्य को सही दिशा दी जाए, ताकि समय रहते यह युवा राज्य अपनी विकास की गति को पकड सके।
-शिवम बड़थ्वाल


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