एनएसए अजीत डोभाल बोले – ”यह जरूरी नहीं है कि, हम वहीं लड़ें जहां तुम चाहो, भारत लड़ाई को वहां ले जाएगा जहाँ से ख़तरा पैदा होता है।”

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का कहना है कि, भारत ना केवल अपनी सीमा में लड़ेगा बल्कि विदेशी जमीन पर भी जाकर लड़ेगा, जहाँ से देश के लिए ख़तरा पैदा होता हो। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब भारत-चीन के मध्य सीमा को लेकर तनाव की स्तिथि बनी हुई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का यह बयान पाकिस्तान को लेकर दिया गया हो, जो कि दुनिया भर में आतंकी संगठनों के रहनुमा के नाम से जाना जाता है और अपनी जमीन पर आतंकवादियों को ट्रेनिंग देकर भारत की सीमा पर घुसपैठ करने की नाकाम कोशिशें करता रहता है। जगज़ाहिर है कि, भारतीय सैनिकों द्वारा दो बार पीओके और बालाकोट में जाकर आतंकी ठिकानों को तबाह किया जा चुका है। लेकिन भारत द्वारा कई बार मुँह की खाने के बावजूद पाकिस्तान अपनी कायराना हरकतों से बाज़ नहीं आता है।

ऋषिकेश स्तिथ परमार्थ निकेतन में डोभाल ने कहा कि, इतिहास गवाह है कि भारत ने आज तक कभी किसी पर पहला वार नहीं किया और ना करेगा, लेकिन अगर इस लिहाज़ से भारत को कोई कमजोर आंकता है तो ये उसकी सबसे बड़ी भूल होगी। भारत यदि हाथ मिलाना जनता है तो उसकी सीमाओं की तरफ उठ रही गलत निगाहों को भेदना की क्षमता भी रखता है। उन्होंने कहा, नई रणनीतिक सोच में यह शामिल है कि, हम सुरक्षा खतरों को कम करने के लिए हम सक्रियता से कार्यवाही कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ”यह जरूरी नहीं है कि, हम वहीं लड़ें जहां तुम चाहो, भारत लड़ाई को वहां ले जाएगा जहाँ से ख़तरा पैदा होता है।”

आधिकारिक सूत्रों ने इस बात पर जोर दिया कि डोभाल का संदर्भ सभ्यतागत नीति पर अधिक था। डोभाल ने कहा, ”हम कभी भी अपने व्यक्तिगत हितों के लिए कभी आक्रामक नहीं होते हैं। हम निश्चित तौर पर अपनी जमीन के साथ विदेशी जमीन पर भी लड़ेंगे, लेकिन व्यक्तिगत हितों के लिए नहीं, परमार्थ आध्यात्मिकता के हित में। हमारा सभ्य राज्य किसी भी धर्म भाषा या संप्रदाय पर आधारित नहीं है, बल्कि इस राष्ट्र का आधार इसकी संस्कृति है।

डोभाल का यह बयान उसी दिन आया है जब एक तरफ आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने चीनी अतिक्रमण को लेकर बात की तो रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी सख्त संदेश दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बीते रविवार को कहा कि, भारत पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सीमा पर तनाव को खत्म कर शांति बहाल करना चाहता है। लेकिन, भारतीय सैनिक देश की भूमि का एक इंच भी किसी को लेने नहीं देंगे। रक्षा मंत्री ने पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के सुकना में स्थित भारतीय सेना के 33 कोर के मुख्यालय में दशहरे के मौके पर शस्त्र पूजा के बाद यह बात कही।

बताते चलें कि, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल बीते शनिवार को उत्तराखंड में अपने पैतृक गांव घीड़ी पहुँच चुके हैं। इस दौरान उन्होंने यहां पर अपनी पत्नी के साथ कुलदेवी बाल कुंवारी का पूजन किया। इतना ही नहीं, उन्होंने ग्रामीणों के साथ खुलकर गढ़वाली भाषा में बातचीत भी की। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनने के बाद से डोभाल ने तीसरी मर्तबा अपने गांव का रुख किया है।


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