देश में पेगासस पर बवाल, गांव प्रधान देश में नागरिक आधुनिक तकनीकी से अनजान

देश में पेगासस पर बवाल, गांव प्रधान देश में नागरिक आधुनिक तकनीकी से अनजान

भारत में कोरोना महामारी की दूसरी लहर की त्रासदी से धीरे-धीरे निकलते और तीसरी लहर के भय के साए में भारत के करीब करीब सभी राज्य अनलॉक हुए तो कुछ राज्यों में बाढ़ और लैंडइसलाइन ने धावा बोला जो अभी त्रासदी में हैं। इस बीच सोमवार दिनांक 19 जुलाई से शुक्रवार दिनांक 13 अगस्त 2021 तक चलने वाले मानसून सत्र जिनमें कुल 19 बैठकें होगी शुरू हुआ। जिसमें जनता को बहुत उम्मीद थी कि देशने कोरोना काल में विपत्तियों का सामना किया और पूरे विश्व ने मेडिकल संसाधनों की आपूर्ति कर भारत को सहयोग किया, अब के संसद सत्र में पक्ष-विपक्ष मिलकर अनेक विषयों पर रणनीतिक रोडमैप बनेंगे, संसद के समक्ष 38 बिलों पर चर्चा होगी और सकारात्मक पहल से कामकाज होगा। जिसमें आम जनता के हितमें काम होंगे…साथियों बात अगर हम संसद सत्र के दोनों सदनों राज्यसभा और लोकसभा की 19 जुलाई 2021 की करें तो मैं और मेरा मानना है कि आम जनता भी बहुत हैरान, आश्चर्यचकित हुएकि एक पेगासस स्पाईवेयर रूपी तकनीकी जिन्न उदय हुआ और खूब हंगामा मचा। जिस तकनीकी सॉफ्टवेयर के बारे में अधिकतम जनता को जानकारी भी नहीं है और दोनों सदन स्थगित हो गए।फिर मंगलवार दिनांक 20 जुलाई 2021 को सदन की कार्यवाही पहले 12बजे तक फिर 2बजे तक स्थगित हुई और अंत में गुरुवार 22 जुलाई 2021 तक स्थगित कर दी गई। साथियों मामला पेगासस स्पाईडर से 300 भारतीयों की जासूसी से जुड़ा था जिसमें पक्ष-विपक्ष के अनेक तर्क थे कि,भारत को बदनाम करने की अंतरराष्ट्रीय साजिश, सरकार पर आरोपों की झड़ी, मंगलवार 20 जुलाई 2021 को संसद की कार्यवाही शुरू होने से ठीक पहले, हाथों में तख़्तियाँ और खिलौने वाले फ़ोन को कान पर लगाए, कुछ विपक्षी दल के सासंद, महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने केंद्र सरकार का विरोध करते नज़र आए, जबकि राज्यसभा में कोरोना पर कुछ चर्चा हुई फिर वह भी हंगामेकी वजह से स्थगित हुई। हालांकि पीएम ने 20 जुलाई को ही शाम 6 बजे कोरोना पर चर्चा के लिए ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई थी और कुछ दलों को छोड़ बाकी शामिल हुए…। साथियों बात अगर हम इस पेगासस स्पाइवेयर की करें तो यह एक सॉफ्टवेयर है और पहली बार 2016 में सामने आया नाम, रिपोर्ट के मुताबिक पेगासस से जुड़ी जानकारी पहली बार साल 2016 में संयुक्त अरब अमीरात के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता की बदौलत मिली। उन्हें कई एसएमएस प्राप्त हुए थे,जो उनके मुताबिक संदिग्ध थे। उनका मानना था कि उनमें लिंक गलत मकसद से भेजे गए थे। उन्होंने अपने फोन को टोरंटो विश्वविद्यालय के सिटीजन लैब के जानकारों को दिखाया, उन्होंने एक अन्य साइबर सुरक्षा फर्म लुकआउट से मदद ली तो अंदेशा सही था। अगर उन्होंने लिंक पर क्लिक किया होता, तो उनका आइफ़ोन मैलवेयर से संक्रमित हो जाता। इस मैलवेयर को पेगासस का नाम दिया गया। लुकआउट के शोधकर्ताओं ने इसे किसी एंडपॉइंड पर किया गया सबसे जटिल हमला बताया। उसके बाद कोरोनाकाल में फिर सामने आया इसका नाम, पिछले साल कंपनी ने ऐसे सॉफ़्टवेयर के निर्माण का दावा किया था जो कोरोनावायरस के फैलने की निगरानी और इससे जुड़ी भविष्यवाणी करने में मदद कर सकता है। इसके लिएमोबाइल फ़ोन डेटा का उपयोग करता है। एनएसओ के मुताबिक वो दुनिया भर की सरकारों के साथ बातचीत कर रहा था और दावा किया था कि कुछ देश इसका परीक्षण भी कर रहे हैं…। साथियों बात अगर हम इस सॉफ्टवेयर की उत्पत्ति की करेंतो,पेगासस एक स्पाइवेयर है जिसे इसराइली साइबर सुरक्षा कंपनी एनएसओ ग्रुप टेक्नॉलॉजीज़ ने बनाया है। ये एक ऐसा प्रोग्राम है जिसे अगर किसी स्मार्टफ़ोन, फ़ोन में डाल दिया जाए, तो कोई हैकर उस स्मार्टफोन के माइक्रोफ़ोन, कैमरा, ऑडियो और टेक्सट मेसेज, ईमेल और लोकेशन तक की जानकारी हासिल कर सकता है। पेगासस को किसी के भी फोन में बेहद गुप्त तरीके से इंस्टॉल किया जा सकता है। इसके शिकार शख्स को भी इस बारे में कोई भनक नहीं लगती। पेगासस को फोन में इंस्टॉल करने का सबसे लोकप्रिय तरीका पिशिंग मैसेज भेजना है। पेगासस एक लिंक भेजता है और यदि उपयोगकर्ता लिंक पर क्लिक करता है, तो उसके फोन पर मैलवेयर या निगरानी की अनुमति देने वाला कोड इंस्टॉल हो जाता है। वपेगासस को तब भी इंस्टॉल किया जा सकता है अगर शख्स के नंबर की जानकारी नहीं है। ऐसे मामलों में बेस ट्रांसरिसिवर स्टेशन के जरिए नंबर का पता लगाया जाता है और इसे गुप्त तरीके से उस शख्स के फोन में इंस्टॉल किया जा सकता है। ऐसे में पेगासस से सुरक्षित रहने का एक आसान तरीका ये है कि कभी भी आप फोन पर आए अनजाने लिंक पर क्लिक न करें और फोन में कोई ऐसा बदलाव नजर आए, जिसे आपने नहीं किया है तो सतर्क हो जाएं। फेसबुक से जुड़े विवाद के दौरान कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा था, हमें अपनी तकनीक और क्राइम और आतंकवाद से निपटने में इसकी भूमिका पर गर्व है, लेकिन एनएसओ अपने प्रोडक्ट का खुद इस्तेमाल नहीं करता। हालांकि, एनएसओ ने पहले ख़ुद पर लगे सभी आरोपों को ख़ारिज किए हैं। ये कंपनी दावा करती रही है कि वो इस प्रोग्राम को केवल मान्यता प्राप्त सरकारी एजेंसियों को बेचती है और इसका उद्देश्य आतंकवाद और अपराध के खिलाफ लड़ना है। उपरोक्त संपूर्ण जानकारी में टीवी चैनलों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का सहयोग दिया गया है। अत: उपरोक्त पूरे मामले का अगर हम अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम देखेंगे कि पेगासस स्पाईसर के बवाल में संसद के 2 दिन भेंट चढ़ गए जबकि आम जनता और हर मोबाइल धारक को आधुनिक तकनीकी के दुष्परिणामों से बचने के लिए एक संदेश मिला, क्योंकि भारत जैसे गांव प्रधान देश में नागरिक आधुनिक तकनीकी से अनजान हैं। जिसके लिए तकनीकी साक्षरता जनजागरण अभियान चलाना जरूरी है।

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