पाकिस्तान में हिंदुओं की तेजी से घटती आबादी?

मनोज वाल्मीकि, नगीना
पाकिस्तान मे अल्पसंख्यक कहलाए जाने वाले हिंदूओ की तेजी से घटाई जा रही आबादी स्पष्ट संकेत दे रही है कि आने वाले समय में वहां से अल्पसंख्यक नाम के जातीय होने का जिक्र केवल किताबों में ही उल्लेख बन कर रह जाएगा ओर पाकिस्तान पूर्ण रूप से इस्लामिक देश कहलायेगा। इसी मिशन में लगे पाक के टेरेरिस्ट आतंकीसंगठनों, राजनेता,का मंसूबा सफल हो जायगा। वैसे तो उनका यह मिशन करीब-करीब सफलता की ओर बढ़ रहा है जिसका प्रमाण 30 परसेंट मे से मात्र तीन परसेंट ही हिंदू परिवार पाकिस्तान में बचे हैं, उन पर भी वहां के इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन और सरकारी मशीनरी अपने मिशन बदस्तूर जारी रखे हुए हैं। पाक कि सरजमी पर हिंदू समुदाय के लोगों विशेषकर हिंदू महिलाओं, युक्तियोऔर नाबालिक लड़कियों पर हो रहे घोर अत्याचारो को देखते हुए भी भारत सरकार खामोश बैठी है यदि विश्वपटल पर पाकिस्तानी हिंदुओं की दर्द भरी पुकार उठाती तो कितनी संख्या नहीं घट पाती भारत के खामोशी के कारण ही पाकिस्तानी लोग वहां के हिंदुओं पर मनमाना जुल्म करते रहे, जबकि पाकिस्तान में सताई जा रहे हिंदू परिवारों के लोग और महिलाएं आज भी हिंदुस्तान की ओर आस लगाए बैठे हैं कि हमें पाकिस्तानी जालिम दरिंदों से जो इंसानियत और मानवता के दुश्मन है और बेगुनाह इंसानों का खून बहाना वे मासूम बहु बेटियों की इज्जत लूटना उनकी आदत और फितरत बन गई है उनसे हमें मुक्ति दिलाएंगे उनका यह सपना कब हकीकत में बदलेगा या फिर इसी सपने की आस में धरे रह जाएंगे।
4 अगस्त 1947 को अंग्रेजी शासकों से हिंदुस्तान आजाद हुआ था लेकिन कट्टरपंथी मुस्लिम नेताओं ने हिंदुस्तान से अलग रहने की मांग करते हुए अलग से अपना मुल्क पाकिस्तान बनाने की जिद पर अड गए जिसको लेकर दोनों देशों के बीच बंटवारा हो गया 15 अगस्त 1947 को हिंदुस्तान ने अपने आप को आजाद होना माना। जबकि पाकिस्तान ने 14 अगस्त 1947 को अंग्रेजों के साथ साथ हिंदुस्तान से भी हमेशा के लिए अलग हो गया दोनों मुल्कों के बंटवारे के बाद यह तय हुआ कि जो पाकिस्तान में हिंदू समाज के लोग हैं वह हिंदुस्तान आ जाए और जो हिंदुस्तान में मुस्लिम समाज के लोग हैं वह पाकिस्तान चले जाएं लेकिन इसके विरोध में राष्ट्रपिता मोहन चंद गांधी सत्याग्रह आंदोलन कर बैठ गए कि जो जहां है वह वही रहेगा इससे दोनों देशो के बीच आपसी सौहार्द और भाईचारा बना रहेगा, इसके बावजूद भी बहुत से लोग हिंदुस्तान छोड़कर पाकिस्तान चले गए बहुत से लोग पाकिस्तान से हिंदुस्तान आ गए लेकिन इसके बावजूद भी पाकिस्तान में 30 परसेंट से ज्यदा हिंदू परिवार के लोग वहां के मूल निवासी बने जिन्हे वोट देने का अधिकार तो मिला लेकिन खुली आजादी के साथ जीने का अधिकार आज तक नसीब नहीं हुआ वहां के हिंदू परिवार के लोग तलवारों बंदूको के खौफ साए में जीते रहे हैंऔर जी रहे हैं। जबकि इतने ही परसेंट मुस्लिम समाज के लोग हिंदुस्तान मे रहे। जो आज भी खुली आजादी के साथ और अपने मूल अधिकारों एवं भारतीय संविधान के आधार पर खुशहाल और सम्मान भरा जीवन जी रहे हैं। हर एक हिंदू भाई अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ साथ मुस्लिम महिलाओं को अपने से ज्यादा सम्मान देता रहा है जो सनातन धर्म की दरिया दिल होने की पहचान है और चाहे जो भी परिस्थितियां हो वह हमेशा उन्हें सम्मान देता रहेगा। लेकिन पाकिस्तान में रह रहे हिंदू समाज के लोग बिना अधिकारो के ही जीवन यापन कर रहे हैं उनको हर पल पाकिस्तानी टेरेरिस्टआतंकवादीसंगठनोंकेखूंखार आतंकवादियों के खौफ वे डर के साए में जीवन बसर कर रहे हैं, पाकिस्तान में हिंदू परिवारों की नाबालिंग लड़कियों का उनके ही घरों से जबरन अपहरणकरना, विवाह मंडपो से उठाना, उनके साथ दरिंदगी करना,और धर्मांतरण करा कर शिव मुस्लिम युवक से निकाह कराने की खबरें अखबारों की सुर्खियों में रहती हैं, इलेक्ट्रिक मीडिया में भी छाई रहती है। जिन्हें सुनकर और पढ़ कर कोई भी हिंदुस्तानी गैर भाजपा नेता अपनी जुवा तक नहीं खोलता। जबकि भारत सरकार मैं विपक्ष के सभी नेता कांग्रेस के राहुल गांधी, गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल, शरद पवार, मुलायम सिंह यादव, सोनिया गांधी, प्रियंका वाड्रा, ललिता पवार, मायावती, केजरीवाल, ओवैसी, फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, माओवादी नेता जेएनयू के छात्र, मदरसों के मौलवी, गले फाड़ फाड़ कर चिल्ला कर हिंदुस्तान का विरोध और पाकिस्तान में चाइना का समर्थन करने जैसे संबोधन देते रहते हैं लेकिन उन सभी नेताओं को पाकिस्तान में हो रहे हिंदुओं पर अत्याचार सुनाई और दिखाई नहीं देते, मासूम बेटियो ओर बहुओ के साथ हो रही दरिंदगी की चीखे, और बेगुनाह मासूम हिंदुओं का बहता खून उन्हें दिखाई नहीं देता। हाँ शायद यह पहली बार देखने को मिला जब पाक में रह रहे हिंदुओं के साथ वहां होने वाले किसी अत्याचार की ख़बर पर भारत के विदेश मंत्री ने सीधे वहां मौजूद भारतीय उच्चायोग से इसकी विस्तृत रिपोर्ट मांगी हो। इसके साथ ही भारत सरकार ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय को इस मामले में आधिकारिक नोट लिख कर वहाँ मौजूद अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए भी कहा है। गौरतलब है कि सिंध से दो लड़कियों के अपहरण की उक्त खबर के कुछ ही देर बाद मुल्तान से भी दो हिंदू लड़कियों के वीडियो सामने आए हैं जिसमें वे सरकार से खुद को कट्टरपंथियों से बचाने की मिन्नत कर रही हैं। हिंदू लड़कियों को अगवा करके उनसे जबरन इस्लाम कबूल करवा कर उनका निकाह करवा देना पाकिस्तान में कितनी बड़ी समस्या है इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इमरान खान ने 2018 मे चुनाव के दौरान यह वादा किया था कि अगर उनकी सरकार बनी तो वह हिन्दू लड़कियों के जबरन धर्मांतरण को रोकने और हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को रोकने के लिए प्रयास ही नहीं बल्कि एक कानून पास कराएंगे जिसमें हिंदू बहू बेटियों और लोगों की सुरक्षा की गारंटी होगी लेकिन पाकिस्तान की ब्रांच सरकार के सभी दावे धरे के धरे रह गए। दरसअल आतंकवाद को खुला संरक्षण देने के मामले में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को पूरे विश्व के सामने बेनकाब किया है। उसी प्रकार अब हिन्दू लड़कियों का जबरन धर्मांतरण कराने वे उनका निकाह करवाने के मामले में भी विश्व बिरादरी में पाकिस्तान का चेहरा बेनकाब हो चला है। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग संस्था मूवमेंट फार सालिडैरिटी एड पीस के अनुसार पार्क में प्रति साल एक हजार से अधिक हिंंदू, सीख व ईसाई जो अल्पसंख्यक है उनकी नाबालिग लड़कियों, महिलाओं, और युवतियों का अपहरण गैंगरेप और जबरन धर्मांतरण करा कर किसी मुस्लिम युवक से निकाह कराना और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार और शोषण के मामले बड़े होने की पुष्टि की, तथा पाक मानवाधिकार (पी एच आर सी) की एक रिपोर्ट ने इमरान सरकार के सभी झूठ पर से पर्दा उठा दिया था इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019 में मानवाधिकार के मामले मैं बेहद चिंताजनक रहे हैं हंस उनको को पर जुल्म भी बड़े हैं और कोरोना काल में जुल्म ज्यादा बढ़ने की भावनाएं व्यक्त की है। महीने लगभग 20 से 25 लड़कियों का उन्हीं के घर से जबरन अपहरण कर धर्मांतरण कराया जाता है। और अब तो वहाँ का मानवाधिकार आयोग ही कट्टरपंथियों की इस दलील को हवा हवाई बता रहा है जो अक्सर उनके द्वारा दी जाती है कि अगवा हुई लड़की ने अपनी मर्ज़ी से एक मुसलमान से शादी की है और वो अब अपने पुराने धर्म या परिवार में लौटना नहीं चाहती। दरअसल 2010 की अपनी रिपोर्ट में पाक मानवाधिकार आयोग ने स्पष्ट कहा था कि अधिकांश मामलों में हिंदू लड़कियों का अपहरण कर उनके साथ बलात्कार किया जाता है और बाद में उन्हें धर्मांतरण के लिए विवाह किया जाता है। आयोग का यह भी कहना है कि यह घटनाएं सिंध प्रांत तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि पाक के अन्य प्रांतों जैसे थार, संघार, जैकोबाबाद समेत दर्जनभर क्षेत्रों में भी ऐसा हो रहा है। इसलिए पाक में हिन्दुओं की घटती जनसंख्या ही अपने आप में वहाँ के हालात के बारे में बयाँ करने के लिए ही बहुत है। हालात यह हो गये है कि अब पाक में मानवाधिकार कार्यकर्ता, कट्टरपंथी से ऊपर सोच रखने वाले समाजसेवी, मीडिया कर्मी, और आम लोग भी इस प्रकार की घटनाओं की निंदा ओर आक्रोश जताने लगे हैं। वे अपनी ही सरकार को अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा देने मे विफल करार बताने लगे रह हैं। यही वजय की अब पाक में धर्मांतरण को रोकने के लिए कानून बनाने की मांग करनेवाले की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। इससे पूर्व में भी 2016 में सिंध विधानसभा के विशेष सत्र मे धर्मांतरण पर रोक लगाने का बिल पास हुआ था लेकिन इस्लामिक कट्टरपंथी संगठनों के विरोध प्रदर्शन के चलते लागू नहीं हो सका था। लेकिन अब मौजूदा परिस्थितियों में इमरान खान और उनका ह्लनया पाकिस्तानह्व धर्मांतरण जैसे इस नाजुक मुद्दे पर अपने ही द्वारा जगाई गई पाक आवाम और खास तौर पर वहां के अल्पसंख्यकों की उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं यह तो समय ही बताएगा। लेकिन उन्हें इस प्रकार नाबालिग और कम उम्र की बच्चियों के धर्मांतरण से उठने वाले कुछ सवालों के जवाब तो देने ही होंगे जैसे, आखिर सिर्फ लड़कियां या महिलाएं ही क्यों ह्लअपनी मर्ज़ीह्व से धर्मपरिवर्तन करती हैं, कभी कोई पुरूष क्यों नहीं? धर्मपरिवर्तन की डगर आखिर निकाहह्व ही क्यों? लड़की धर्मपरिवर्तन के बाद ह्लपत्नीह्व ही बनती है, बेटी या ह्लबहन क्यों नहीं? लड़कियों का धर्मपरिवर्तन कराने के बाद हर बार पति ही मिलता है भाई या पिता नहीं ? इन सुलगते हुवे सवालों से हिंदुस्तान के उन नेताओं को सबक लेना चाहिए जो हिंदुस्तान मे रहते है, ओर हिंदुस्तान का खाते हैं, और गुणगान पाकिस्तान का करते हैं। उनके अनकहे बोलो से ही हिंदुस्तान शर्मसार हो जाता है। वे जो भी बोले संभल कर बोले कि कहीं हमारे अनकहे बोलो से मेरे हिंदुस्तान का सर तो नहीं झुक रहा है, राजनीतिक देश के लिए करें समाज के उद्धार के लिए करें देश को नीचा दिखाने वाली राजनीतिक ना करें।


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