असत्य पर सत्य की जीत का द्योतक : दशहरा त्यौहार

यूँ तो देश में प्रत्येक त्योहारों की अपनी अलग ही महत्ता है लेकिन असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक दशहरा या विजयदशमी का त्योहार यहां बड़े ही हर्षोउल्लास से मनाया जाता है। निसंदेह ये त्योहार भारतीय संस्कृति के वीरता को दर्शाने वाला और शौर्य का द्योतक है। आश्विन शुक्ल दशमी को मनाया जाने वाला दशहरा यानी आयुध-पूजा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। इस त्यौहार को मनाये जाने का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो। इसी दिन लोग नया कार्य प्रारंभ करते हैं, इस दिन शस्त्र-पूजा, वाहन पूजा की जाती है।

भारत एक कृषि प्रधान देश है। जब किसान अपने खेत में सुनहरी फसल उगाकर अनाज रूपी संपत्ति घर लाता है तो उसके उल्लास और उमंग का ठिकाना नहीं रहता। इस प्रसन्नता के अवसर पर वह भगवान का आभार प्रकट करते हुए उसका पूजन करता है। मान्यता है कि, यह रण यात्रा का द्योतक है, क्योंकि दशहरा के समय वर्षा ऋतु समाप्त हो जाती हैं और नदियों अपने उफ़ान उतर आती है। अर्थात धान आदि सहेज कर में रखे जाने वाले हो जाते हैं।

इस उत्सव का संबंध नवरात्रि से भी है, क्योंकि नवरात्रि के उपरांत ही यह उत्सव होता है और इसमें महिषासुर के विरोध में देवी के साहसपूर्ण कार्यों का भी वर्णन देखने को मिलता है। दशहरा या विजया दशमी नवरात्रि के बाद दसवें दिन मनाया जाता है। भगवान राम युद्ध की देवी मां दुर्गा के भक्त थे, उन्होंने युद्ध के दौरान पहले नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा की और दसवें दिन दुष्ट रावण का संहार किया। इसलिए विजयादशमी एक बहुत ही पवित्र दिन है। राम की विजय के प्रतीक स्वरूप इस पर्व को ‘विजयादशमी’ कहा जाता है।

दशहरा पर्व पर मेले- दशहरा पर्व को मनाने के लिए जगह-जगह बड़े मेलों का आयोजन किया जाता है। यहां लोग अपने परिवार, दोस्तों के साथ आते हैं और खुले आसमान के नीचे मेले का पूरा आनंद लेते हैं। रामलीला और रावण वध- इस समय रामलीला का भी आयोजन होता है। रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है। दशहरा अथवा विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाए अथवा दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में यह शक्ति-पूजा, शस्त्र पूजन, हर्ष, उल्लास तथा विजय का पर्व है। रामलीला में जगह-जगह रावण वध का प्रदर्शन होता है।

शक्ति के प्रतीक का उत्सव- शक्ति की उपासना का पर्व शारदेय नवरात्रि प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल से मनाया जा रहा है। इस मौके पर लोग नवरात्रि के नौ दिन जगदंबा के अलग-अलग रूपों की उपासना करके शक्तिशाली बने रहने की कामना करते हैं। भारतीय संस्कृति सदा से ही वीरता व शौर्य की समर्थक रही है। दशहरे का उत्सव भी शक्ति के प्रतीक के रूप में मनाया जाने वाला उत्सव है।

ग़ौरतलब है कि, कोरोना काल में लगे लॉकडाउन से जहाँ आम जीवन अवव्यवस्थित हुआ है, वहीं, देश मे होने वाले कई त्यौहार व मेले भी कोरोना की भेंट चढ़ गये हैं। अब धीरे-धीरे ही सही अनलाक में छूट मिलने के साथ ही सभी व्यवस्थाएँ पटरी पर आ रही है हालाँकि कोरोना महामारी के चलते अभी भी कई नियमों का पालन करना जरूरी है।

यह सर्वविदित है कि अक्टूबर से दिसम्बर माह तक देश मे त्यौहारो का सीज़न शुरू हो जाता है। जिसको देखते हुए, सरकार ने नवरात्रि, रामलीला, दशहरा, दीपावली ईद, क्रिसमस आदि पर्वों के आयोजन को कुछ शर्तों के साथ मंज़ूरी दे दी है। साथ ही
कहा गया है कि, इस दौरान होने वाले आयोजनो में अधिकतम 200 लोग शामिल हो सकते हैं। इसके आयोजकों को मास्क, थर्मल स्कैनिंग, सैनिटाइजेशन तथा दो गज दूरी का सख़्ती से पालन कराना होगा।


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