कोरोना जांच: डब्ल्यूएचओ टीम को चीन ने एंट्री से रोक…आखिर ड्रैगन क्या छिपा रहा है…

नई दिल्ली। आखिर जिसका डर था वही हुआ। चीन ने डब्ल्यूएचओ के वैज्ञानिकों को कोराना वायरस की जांच करने से रोक दिया है। ड्रैगन द्वारा वीजा नियमों का हवाला देते हुए टीम के सदस्यों को अपने यहां आने की अनुमति नहीं दी। जहां कोरोना वायरस का पहला केस मिला था।
ज्ञात हो कि एक वर्ष पूर्व कोविड-19 का पहला मरीज चीन के बुहान शहर में मिला था और उसके पश्चात पूरे विश्व में इस महामारी ने हाहाकार मचा दिया है, जिस कारण सभी देशों को अपने यहा लॉक डाउन से गुजरना पड़ा और एक साल बीतने के बावजूद यह बीमारी मिटने का नाम नहीं ले रही है। गत वर्ष स्वास्थ्य संगठन ने 190 से अधिक सदस्य देशों वाले संचालक मंडल विश्व स्वास्थ्य सभा ने अंतरराष्ट्रीय एवं डब्ल्यूएचओ के कदमों के निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं समग्र मूल्यांकन के लिए कोविड-19 की स्वतंत्र जांच कराये जाने का प्रस्ताव पारित किया था। उसने डब्ल्यूएचओ से इस वायरस के स्रोत और मानव जाति तक उसके पहुंचने के मार्ग की जांच करने को भी कहा है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टीए ग्रेबेसियस ने चीन द्वारा बीजा न दिये जाने पर ड्रैगन को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि अगर चीन ने बीजा देने से इंकार किया तो उस पर बंदिशें लगाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि हमारे वैज्ञानिकों में से दो सदस्य अपनी यात्रा शुरू कर चुके हैं तथा बाकी सदस्यों को चीन द्वारा बीजा में देरी के कारण रूकना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मैंने चीन के सीनियर अधिकारियों से इस संबंध में बातचीत की है। डब्ल्यूएचओ महानिदेशक ने कहा कि स्पष्ट कर दिया था कि यह मिशन संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी की प्राथमिकता है और उन्हें यह आश्वासन दिया गया था कि चीन इसके लिए आंतरिक प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा कर रहा है तथा हम जल्द से जल्द मिशन शुरू करना चाहते हैं। विश्वभर के विशेषज्ञों के वुहान पहुंचने की संभावना है, जहां एक साल पहले कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आया था। डब्ल्यूएचओ के एक अन्य प्रमुख ने कहा कि चीन द्वारा विशेषज्ञों को वीजा सहित अन्य आवश्यक मंजूरी नहीं दी गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से पिछले साल मुलाकात की थी। बता दें कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए डब्ल्यूएचओ ने वैज्ञानिकों की एक टीम का गठन किया है। यह टीम चीन के वुहान का दौरा करेगी और इसकी उत्पत्ति की जांच करेगी, क्योंकि कोरोना वायरस का पहला केस इसी शहर में मिला था।


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