ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन चुनाव के लिए भाजपा ने उतारे सारे घोड़े मैदान में : निशाने पर….. पढे़ पूरी खबर

नई दिल्ली। एनडीए और खासकर बीजेपी केन्द्र सहित कई राज्यों में अपनी जड़े जमा चुकी हैं और अब पार्टी ने अपना सारा फोकस बंगाल सहित दक्षिण भारत के राज्यों पर कर दिया है और इसके लिए उन्होंने जीएचएमसी यानी ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन चुनावों के लिए अपनी पूरी ताकत झोंककर भाजपा नेतृत्व ने साबित कर दिया है कि उसे आलोचनाओं की परवाह नहीं है, बल्कि वह अपने विस्तार की हर गुंजाइश में अपनी सफलता की कहानी लिखने के लिए तैयार है। इसलिए उन्होंने निजाम नगरी हैदराबाद पर कब्जे के लिए अपने रथ के सारे घोड़े खोल दिये हैं।
केंद्र की सत्ता पर लगातार दो बार से काबिज भाजपा के लिए दक्षिण भारत के पांच में से चार राज्य अब तक पहेली बने हुए हैं। तेलंगाना भी उनमें से एक है। हालांकि लोकसभा-2019 चुनावों में भाजपा ने यहां की 17 में से चार सीटों पर जीत दर्ज करके धमक बनाने की कोशिश की, लेकिन वह जानती है कि देशव्यापी समर्थन हासिल करने के लिए दक्षिण के राज्यों में भी उसके राजसूय यज्ञ के घोड़े का निर्बाध दौड़ना जरूरी है। भाजपा ने अपने पांव सुदूर उत्तर से लेकर पूरब, पश्चिम और उत्तर-पूर्व तक फैला लिए हैं। सही मायने में वह अखिल भारतीय पार्टी बन चुकी है। इसके बावजूद दक्षिण से उसे अब तक वह समर्थन हासिल नहीं हो पाया है, जिसकी उसे दरकार है। यही वजह है कि पार्टी ने जीएचएमसी के स्थानीय चुनावों को दक्षिण में अपनी पैठ का जरिया बनाने की कोशिश की है। पार्टी को लगता है कि अगर उसने निजाम के किले पर कब्जा कर लिया तो दक्षिण के बाकी दरवाजे खोलना उसके लिए आसान हो जाएगा। पार्टी अध्यक्ष जय प्रकाश नड्डा वहां पदयात्रा करने वाले हैं। भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या हैदराबाद में प्रचार करके तेलंगाना सरकार द्वारा थोपे गए मुकदमे की सौगात लेकर दिल्ली पहले ही लौट चुके हैं। वहीं भाजपा के विजय रथ के बलशाली महारथी के तौर पर स्थापित हो चुके कौटल्य अर्थात चाणक्य कहे जाने वाले गृहमंत्री अमित शाह भी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। यहां ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन में 150 सीटें हैं। इनमें पिछली बार हुए चुनाव में राज्य की सत्ताधारी तेलंगाना राष्ट्र समिति को 99 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि 44 सीटों पर ओवैसी की पार्टी एआइएमआइएम को जीत मिली थी। भाजपा को महज चार सीटों से ही संतोष करना पड़ा था। इस बार पार्टी का सारा फोकस ओवैसी की एआईएमआईएम पर है। अगर बीजेपी ने ओवेसी को पटकनी दे दी तो उनके लिए आगे का रास्ता खुल सकता है।


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