हिंदुस्तान

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रामराज्य कोई कल्प नहीं है,
मानवता का दर्पण है…
केवल रामायण ग्रंथ नहीं हैं,
वरन
पूर्वजों का वर्णन है…
महाभारत सा युद्ध ना कोई,
मातृभूमि को तर्पण है,
और हिन्दू राष्ट्र कोई स्वप्न नहीं हैं,
सत्यता का स्मरण है।
सुनो,
अब कोई हिन्दू नहीं अकेला है,
भारत माँ की रक्षा हेतु,
राम भक्तों का मेला है।।
जाने कितने गौरी आये,
गजनवी आकर चले गए,
जाने कितने बाबर आये,
औरंगे आकर चले गए,
आर्यावर्त्त ने शरण दी सबको,
फिर हिन्दू उन्ही के द्वारा छले गए।।
पर,
अब देर नहीं होगी, फिर त्रुटि नहीं होगी,
हम ही शरण दें, हम ही मार खाएं,
फिर त्रुटि नहीं होगी,
हिन्दूराष्ट्र की सेवा में,
अबकी भृकुटि तनी होगी।

-सुशील रस्तोगी, किच्छा

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