रात के वक्त कभी पैदल न चले, जाने कारण!

पैदल चलने के लिए सूर्यादय का समय सबसे सही रता है। इस वक्त वायुमंडल में जीवनदायी तत्व ज्यादा मात्रा में रहते हैं। सूर्यादय के समय पेड पौधे भोजन बनाना शुरू करते है और वायुमंडल में ऑक्सीजन छोड़ते है। यही वजह है कि इस वक्त वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ी हुई होती है। वॉकिंग का मकसद ही ज्यादा से ज्यादा ऑक्सीजन शरीर के सभी अंगों तक पहुंचाना होता है। इसलिए सूर्योदय के समय ही वार्किंग करनी चाहिए, आम इंसान को 40 से 45 मिनट रोज चलना चाहिए?
इस जन्म में जो कुछ भी हमें करना है वह इस शरीर के माध्यम से ही करना है। इस कारण शरीर निरोग, स्वरूप सक्रिय एवं उसे प्रसन्न रखना है भोजन करते समय हमें पानी नहीं पीना चाहिये।
इसे यज्ञ के उदाहरण से स्पष्ट किया जा सकता है यज्ञ करने के लिए सर्वप्रथम हवन कुण्ड में छोटी-छोटी समिधाएं, लकड़ियाँ लगाकर अग्नि प्रज्वलित करते है अग्नि प्रज्वलित हो जाने के बाद उसमें घी और समाग्री डालते हैं। उस हवन कुण्ड के चारों ओर बैठे स्त्री पुरूष तथा बच्चे उसमें अंधा धुंध सामग्री और घी की आहुतियां देते रहेंगे तो उस अंधा धुंध डाले हुए घी और सामग्री को अग्नि जला नहीं पाएगी, वह दब जाएगी, मंद हो जाएगी उसे धुआँ निकलने लगेगा। धुएं के कारण आसपास बैठे व्यक्तियों की आखों से पानी बहने लगेगा और हाँ! यदि अपने घी और सामग्री के साथ एक दो चम्मच पानी भी उसमें डाल दिया जो वह अग्नि बुझ जाएगी, घी और सामग्री को जला नहीं पाएगी। ठीक इसी प्रकार जब हमें भूख का अनुभव होता है तो इसका अर्थ यह है कि हमारे पेट में हवन कुण्ड की भांति अग्नि प्रजवलित हो गई है। अब उस अग्नि को जलाने अथवा पचाने के लिए भोजन रूपी सामग्री चाहिए। यदि आप भोजन को ठूंस ठूंस कर जरूरत से ज्यादा पेट में भर लेंगे तो वह भोजन अग्नि को दबा देगा। अग्नि उसीोजन को जला नहीं सकेगी, पचा नहीं सकेगी, पेट में धुआँ उठ जाएगा गैस भर जाएगी और आप पेरेशान हो जाएंगे। आगे चलकर यह गैस शरीर के अंग अंग में फैलने लगेगी और जहां भी जोड़ हैं जैसे:- घुटने का जोड, कोहनी का जोड आदि आदि में रूक जाएगी और उन जोडो में दर्द, गठिया आदि उत्पन्न हो जाएंगे।
समझ लिया आपने कि आप कितनी भयंकर भूल करते हैं, भोजन को ठूंस ठूंस कर पेट में भरकर अथवा भोजन के बीच में पानी पीकर। वज्रासन में बैठने का जहां तक संबंध है, वज्रासन एक चमत्कारी आसन है। इसके अभ्यास से मूलाधार में स्थित वज्र नाड़ी प्रभावित होती है। संतो योगियों का हना है कि वज्र नाडी का सीधा संबंध पाचन संस्थान से है। इसलिए वज्रासन में कुछ देर बैठने से भोजन पाचन सरलतापूर्वक जल्दी हो जाती है। यदि आपने अपने खान पान, रहन सहन और आचार विचार में सुधार कर लिया तो आपका शरीर और मन कुंदन के समान शुद्ध तथा गंगाजल के समान पवित्र हो जाएगा। आप स्वस्थ, सक्रिय, प्रसन्न और आनन्दित होते हुए, जीवन का आनन्द प्राप्त कर सकेगे।


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