उत्तराखण्ड में कोरोना विस्फोट

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उत्तराखण्ड जैसें हिमालयी प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण का प्रसार विस्फोटक रूप ले चुका हैं। बीते दिवस 94 कोरोना वायरस संक्रमित पूरे राज्य भर में मिले हैं। जब से उत्तराखण्ड राज्य में केन्द्र सरकार के निर्देशों का अनुपालन करते हुए राज्य सरकार के प्रयासों से दूसरे प्रदेशों में फंसे प्रवासी उत्तराखंड़वासियों को उनके गृहक्षेत्र मे वापस लाया गया तब से उत्तराखण्ड़ राज्य में मानों कोरोना वायरस संक्रमण ने प्रदेश में संक्रमितों की संख्या ने रफ्तार पकड़ ली है। अगर बात करें नैनीताल जिले की ही तो यहां स्थिति बेहद चिंताजनक हो रही है। बताया जा रहा है कि नैनीताल जिले में आज भी अधिक संख्या में नए मरीज कोरोना संक्रमण के पाए गए हैं। बीते दिवस नैनीताल जिले में 55 मरीज कोरोना संक्रमित पाए गए थे।

जिसकी जानकारी मिलते ही प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं। ये कोरोना वायरस संक्रमित लोग महाराष्ट्र से ट्रेन से हल्द्वानी पंहुचे थे। इसके बाद ये लोग प्रशासन के माध्यम से बस द्वारा हल्द्वानी भेजे गये थे। जिस ट्रेन से ये लोग उत्तराखण्ड आए उसमें कुल 1400 लोग यात्रा कर रहे थे। अब कल्पना की जानी चाहिए कि 57 कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के साथ आने वाले ये शेष लोग इस समय कितने बड़े स्तर के खतरे मे हैं। ये शेष यात्रा कर रहे लोग ना जाने किन-किन स्थानो में गए होंगे और कितने लोगों से मिले होंगे। इतनी भारी संख्या में लोगों की पहचान कर पाना प्रशासन के लिए भूसे के ढेर मे सुई ढूंढ पाने जैसा है। विगत शनिवार को उत्तराखंड राज्य में मिले कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या ने अब तक के हर बड़े रिकॉर्ड तोड़ दिया है। कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर उत्तराखण्ड राज्य में स्थिति बेहद खराब हो रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में शाम तीन बजे तक कोरोना वायरस संक्रमितों का आंकड़ा 298 तक पंहुच गया है। हालांकि कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर राज्य मे बेहतर खबर यह है कि 60 के लगभग लोग उपचार कराकर ठीक होकर अपने घरों को लौट चुके हैं। लेकिन जिस तरह से उत्तराखण्ड जैसें पहाड़ी प्रदेश में लगातार तेजी से कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं यह इस छोटे से भौगोलिक रूप से विषम पर्वतीय राज्य के लिए तब अच्छी खबर नही मानी जा सकती है क्योंकि पूरे उत्तराखण्ड राज्य के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का घोर अभाव है यहां ना तो इतने अच्छे अस्पताल है कि वहां अगर ईश्वर ना करे अगर कोरोना वायरस संक्रमण इसी तीव्र वेग से आगे बढ़ेगा तो इनके लिए आइसोलेशन वार्ड तो छोड़िये सामान्य अस्पतालों मे ही जगह कम पड़ सकती है और यदि कोरोना वायरस संक्रमण के मामले इसी तरह तेजी से प्रदेश में बढ़ते रहे तो उत्तराखण्ड सरकार को एक बार फिर से राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण की वर्तमान स्थिति और उससे पैदा हुए हालातों की समीक्षा करने के साथ ही राज्य मे स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर बराबर नजर बनाये रखने की आवश्यकता होगी।

वहीं लोगों के लिए भी अब कोरोना वायरस संक्रमण को नियंत्रित करने मे बराबर सहयोग और सहभागिता की आवश्यकता होगी क्योंकि केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार ने संक्रमण रोकने के लिए लाॅक डाउन जैंसे महत्वपूर्ण कदम उठा लिए हैं। अब तक पूरे देश में चार लाॅकडाउन लागू हो चुके है। देश को और अधिक लाॅक डाउन में नही रखा जा सकता है क्योंकि इससे तो हालता कई क्षेत्रों में विषम हो जायेंगे तथा देश को कई जटिलताओं तथा समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। अतः इसका सबसे बेहतर उपाय यही है कि अब हम कोरोना के साथ-साथ जीना सीख लें। जिस तरह से एचआईवी वायरस का कोई इलाज नही है ठीक उसी तरह फिलहाल कोरोना वायरस संक्रमण का भी कोई इलाज दिखाई नही देता तो फिर कोरोना संक्रमण से बचाव के उपाय ही इससे हमे हमारे परिवार समाज तथा देश को इसके प्रभाव से सुरक्षित रख सकते हैं।

उत्तराखण्ड राज्य में राज्य सरकार द्वारा अब तक बेहतर प्रयासों से कोरोना वायरस संक्रमण को नियंत्रण में रखा गया था केवल राज्य के बाहर से आये जमातियों के कुछ मामले थे लेकिन जब से दूसरे प्रदेशों से प्रवासी उत्तराखण्डियों की राज्य मे वापसी शुरु हुई तब से कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों मे अचानक बहुत तेजी आ गई है।

।।विभू ग्रोवर।।  

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